उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में इस तरह से खेली जाती है होली, देखिये

                                         उत्तराखंड गढवाल होली विशेष 

उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में होली का त्यौहार बड़े ही धूम -धाम से मनाया जाता है  इन इलाकों में होली की शुरआत फाल्गुन शुक्ल एकादशी से हो जाता है इस दिन से गावं के बच्चे, जवान यहाँ तक की बूढ़े लोग भी इस दिन से अगल- बगल अपने पड़ोसी गावों में चंदा मांगने जाते है जब ये लोग चंदा मांगने जाते है तो उसमे कुछ अपने विशेष प्राचीन वस्त्र जैसे-( चदरि,पगड़ी , सफ़ेद टोपी ) आदि बहुत प्रकार के प्राचीन पूर्वजों के पहनावे को पहन कर निकलते हैं  इसमें सभी गावों की अलग -अलग टोलियां होती  है जब ये लोग अन्य  गावं में चंदा मांगने निकलते हैं तो साथ में (ढोलकी।, थाली ,डमरू , बांसुरी ) बजाते हुए जाते हैं और साथ में होली का गढ़वाली गीत भी गाते है लोगों के घरों में पहुंचकर ये घर के सामने यानि चौक में एक गोल घेरा बनाकर कार्य कर्म शुरू करते  हैं व जो टीम का ग्रुप का सबसे बड़ा लीडर होता है ,वो सबसे आगे चलकर हाथ में सफ़ेद झंडा लेकर गीत गायन शुरू करता है तथा  सभी टीम उनके साथ सुर से सुर मिलकर गीत गाते हैं। और इसमें दो जोकर भी बनाये जाते है जो घेरे के बीच में जाकर नृत्य करते है उनके मुहं पर जोकर वाला मास्क लगाया जाता है। और हाथ में दो डांडिया प्रकार के डंडे होते है जिनसे वे एक दुसरे के साथ खेलकर नृत्य दिखाते हैं।

इस कार्य कर्म में गए जाने वाले गीत रामायण से सम्बंधित होते है. जिन्हे लोग गढ़वाली में गाते है। इस कार्य कर्म को देखने के लिए पूरे गावं के लोग एकत्रित होकर देखते हैं। और फिर ये लोग गावं के हर परिवार में चंदा मांगते हैं। चंदा में लोग पैसे , चावल तो कोई दाल आदि अनेक प्रकार के सामग्री देते हैं। इन को वहां के लोग ( होरी वाले  ) कहकर बुलाते हैं।  इन होरी वालों का यह सिलसिला लगभग एक महीना चलता है। और सीधे  होली के दिन ही ये लोग अपने गावं लौटते है और फिर होली के दिन फिर हर एक गावं  के सारे लोग मिलकर होली के रंग में रंगे होते हैं। और फिर बाद में होलिका का एक बड़ा सा पुतला बनाकर होलिका दहन करते हैं।

और उसके बाद गावं के पंचायती चौक में डीजे लगाकर  झूम – झूम  कर नाचते हैं  रंगों व  भांग के आसार में लोग पूरी तरह डूबे रहते हैं , और पूरे दिन भर होली का आनंद लेते है। ……..

तो ये है मेरे प्यारे पहाड़ की होली त्योहार को मनाने का रीति- रिवाज। उम्मीद करता हूँ आपको पसंद

 

उदय बिष्ट

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