उत्तराखण्ड को ग्रीन बोनस 15 वें वित्त आयोग के पिटारे में हैं : श्री एन के सिंह

नीति आयोग के उपाध्यक्ष श्री राजीव कुमार ने कहा है कि
उत्तराखण्ड को ग्रीन बोनस 15 वें वित्त आयोग के अध्यक्ष श्री एन के सिंह के पिटारे में हैं।

गौर तलब है 15 वें वित्त आयोग की सिफारिशें 1 अप्रैल, 2020 से शुरू होने वाले पांच साल की अवधि के लिए होंगी.

सवाल यह है उसमें ग्रीन बोनस की सिफारिश हो भी सकती है
और नहीं भी हो सकती है। यह घाघ एनके सिंह पर निर्भर करता है।
वह योजन आयोग के सदस्य रह चुके हैं। वह देश के राज्यों का दौरा करते रहते हैं।

एनके सिंह देश के राजस्व सचिव रह चुके हैं। 1964 बेच के आईएएस अधिकारी हैं। बाजपेयी के टाइम में पीएमओ में सचिव रहे। एनके के पिता भी वित्त सचिव रह चुके हैं।
माँ सांसद रह चुकी हैं। भाई भी सांसद रह चुका है। दो बहनें देश की सचिव रह चुकी हैं। 14 से पहले एनके जेडीयू से राज्य सभा सांसद थे। 14 में वे बीजेपी में शामिल हो गए थे। उन्हें वित्त का जानकार माना जाता है। इतना घाघ आदमी, ब्यूरोक्रेट्स को बखूबी मालूम है कि ग्रीन बोनस का हिमालयी राज्यों को हक़ है या नहीं।
यही कारण था जब नीति आयोग राजीव कुमार से ग्रीन बोनस के
बारे में पूछा गया तो वह झन्नानते हुए बोले जब एनके सिंह के पास मामला है तब इसके सवाल नहीं उठने चाहिए।

एक रिपोर्ट के मुताबिक देश को दी जा रही 18 वन सेवाओं की फ्लो वैल्यू 95.11 हजार करोड़ है, जबकि तीन सेवाओं की स्टॉक वैल्यू 14.13 लाख करोड़ आंकी गई है।

उत्तराखंड, हिमाचल, मेघालय, मणिपुर, त्रिपुरा, मिजोरम, अरुणाचल, असम, नागालैंड, सिक्किम व जम्मू-कश्मीर, भी ग्रीन बोनस का लाभ मिलने की आहर्ताये रखते हैं।

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