और छूट गया इस बार भी हिमालय रत्न जिसका अफसोस हमें होता रहेगा

शीशपाल गुसाईं
मैं 1 माह पहले एक बहुत सीनियर आईपीएस अधिकारी से इतिहास के बारे में जिक्र कर रहा था , ऐसे ही नेगी दा के बारे में जिक्र आया, उन्होंने कहा पद्मश्री, पद्मभूषण से कहीं बड़े हैं नेगी।

फिर देहरादून के मशहूर डॉक्टर न्यूरोलॉजी सर्जन से नेगी दा का प्रसंग आया। तो उन्होंने भी यही कहा उनका कद बड़ा है।हालांकि पद्म श्री डॉक्टर साहब को कब का मिल जाना चाहिए था।
गलती से उनके बदले का पुरस्कार किसी और को मिल गया।

तो एक आईपीएस, एक मशहूर डॉक्टर Mch की नेगी दा के बारे में यह इज्ज्त है।लेकिन उनकी समझ हिमालय जैसी है। सोचिए दो हस्ती ने नेगी दा के बारे में यह विचार रखते हैं। और कितने लोग क्या ख्याल, क्या विचार रखते होंगे। अनगिनत योग्य लोग हैं।
लोग उन्हें बड़ी लग्न से सुनते हैं। चाहे विज्ञानी क्यों नहीं।

उन्होंने गढ़वाल को जिंदा किया। उनकी भाषा को जिंदा किया।
खाले, गाडियारे , धार , खेत, खलिहान, पनियार, बांज बुरांस, बद्री केदार, लग भग सभी चीज को जिंदा रखा। सबसे बड़ी बात
बोली को जिंदा किया। जिसे हम भूल जाते। पिज़ा, बर्गर में गुम हो जाते।

जागर गायक प्रीतम भरतवाण जी और बछेंद्री पॉल, अनूप शाह को क्रमसः पद्म श्री पद्म भूषण, पद्म श्री मिला , हम गद गद हैं। वो हमारे हीरे हैं। प्रीतम ने आज के युग में जागर को सामने लाया। और बछेंद्री जी ने उस जमाने एवरेस्ट फतह किया जब साधन उपलब्ध नहीं थे। अनूप शाह उस संसार के उम्दा छायाकार हैं जो महीनों उस लोकेशन की इंतजार करते हैं जहाँ से संजीदा चित्र उकेरे जाते हैं।उत्तराखंड के पत्रकारो, छायाकारों के लिए आज का दिन ऐतिहासिक है। कम से कम अनूप शाह से लाइन शुरू तो हुई
लेकिन कोहिनूर हीरा छूट गया। जिसका अफसोस हमें होता रहेगा।

नेगी दा जिंदा बाद। मैं आपका वो गाने की प्रैक्टिस करता रहता हूँ
जिसको आपने गाया – चम चम चम चम चमकी घाम डांडियों मा,
हिमालय कांठियों मा, चांदी की बणि गयेना…

वो सुबह भी होगी, और घाम चमकेगा ….

फिर ये गीत भी उनका याद आता है कैका का मना की, कैना नी जआणि ….

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