प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बायोपिक में नजर आएंगी उत्तराखंड की खूबसूरत वादियां, तलाशी जा रही है लोकेशन

सबकुछ ठीक रहा तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बायोपिक में उत्तरकाशी के हर्षिल और आसपास की खूबसूरत वादियां दिखाई देंगी। फिल्म निर्देशक ओमांग कुमार को यहां की वादियां काफी पसंद आईं। इसके अलावा, गंगोत्री, लाखामंडल (देहरादून) और रुद्रप्रयाग में भी टीम लोकेशन देखेगी।
बताया जा रहा है कि फिल्म की शूटिंग गुजरात और उत्तराखंड में होनी है। सात जनवरी को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने फिल्म का पोस्टर लांच किया था। फिल्म में अभिनेता विवेक ओबरॉय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का किरदार निभाएंगे।
फिल्म ‘मैरीकॉम’ और ‘सबरजीत’ के निर्देशक ओमांग कुमार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर बनने वाली बायोपिक की लोकेशन तलाशने को उत्तरकाशी पहुंचे। कलक्ट्रेट में जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान से ओमांग कुमार ने प्रधानमंत्री पर बनने वाली बायोपिक के लिए लोकेशन पर चर्चा की।
उन्होंने हर्षिल, गंगोत्री और नेलांग घाटी में मौसम की जानकारी भी विशेषज्ञ से प्राप्त की। उन्होंने हर्षिल व गंगोत्री में पुरानी गुफाओं की लोकेशन, घाटी के पुरानी संस्कृति से जुड़े गांव, लकड़ी के मकान और नदी व झरनों की लोकेशन की भी जानकारी हासिल की।
इस मौके पर टीम के सदस्यों ने लाखामंडल, शिव गुफा ब्रह्मखाल उत्तरकाशी, शनि गुफा डुंडा, भीम गुफा, सात ताल के बारे में भी होमवर्क किया। निर्देशक कांडार देवता मंदिर में दर्शन के लिए भी गए। उन्होंने माघ मेले के मुख्य कार्यक्रम हाथी का स्वांग में भी हिस्सा लिया।
इसके बाद वे हर्षिल घाटी के लिए रवाना हुए। हर्षिल घाटी में निर्देशक ओमांग कुमार और उनकी टीम दो दिन रहकर लोकेशन तलाश करेंगी। टीम के सदस्यों ने बताया कि फिल्म की शूटिंग गुजरात और उत्तराखंड में होगी।
गौरतलब है कि मंगलवार को ओमांग कुमार और उनकी टीम ने मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत से भी मुलाकात की थी। मुख्यमंत्री ने फिल्म की शूटिंग में पूरे सहयोग का आश्वासन दिया था।
धानमंत्री नरेंद्र मोदी को उत्तराखंड से खासा लगाव है। अपनी राजनीति यात्रा के शुरुआती दिनों से ही उनका यहां आना जाना लगा रहा। खासकर केदार घाटी उनके पसंदीदा स्थलों में शामिल है। केदार घाटी स्थित गुफाओं में उन्होंने साधना की थी। केदारनाथ में वर्ष 2013 में आई आपदा के बाद गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने केदार घाटी को संवारने में मदद की इच्छा जताई थी।
हालांकि राजनीतिक कारणों से उनकी इच्छा पूरी नहीं हो पाई। राज्य की तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने उन्हें इसकी अनुमति नहीं दी। प्रधानमंत्री बनने के बाद से अब तक वह 11 बार उत्तराखंड आ चुके हैं।

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