यहां आंगन में गढ़ा जा रहा है देश का भविष्य

टिहरी जिले के थौलधार विकासखंड के ग्राम बांडा में चार वर्षों से प्राथमिक विद्यालय का भवन ध्वस्त है। इससे बच्चे पंचायत घर के खुले आंगन में पढ़ने को मजबूर हैं।


कंडीसौड़, टिहरी : थौलधार विकासखंड के ग्राम बांडा में चार वर्षों से प्राथमिक विद्यालय का भवन ध्वस्त है। इससे बच्चे पंचायत घर के खुले आंगन में पढ़ने को मजबूर हैं। इन बच्चों की फिक्र न सरकार को है और ना विभाग को। भवन के अभाव में विद्यालय में छात्र संख्या भी घट गई है।

थौलधार विकासखंड की ग्राम पंचायत बांडा में प्राथमिक विद्यालय का भवन  वर्ष 2013 में ध्वस्त हो गया था। तब से नौनिहालों का शिक्षण कार्य गांव के पंचायत घर के आंगन मे चल रहा है। पंचायत घर के दो कमरों में से एक कमरे में ग्राम पंचायत का सामान एवं दूसरे कमरे में प्राथमिक विद्यालय का सामान रखा हुआ है।

बरसात के समय सबसे ज्यादा परेशानी होती है। विद्यालय में लगभग 15- 16 छात्र संख्या है। पूर्व में इस विद्यालय में तीस से ऊपर छात्र संख्या थी। लेकिन भवन ध्वस्त होने के बाद भी नए भवन का निर्माण नहीं हो पाने के कारण ग्रामीणों ने मजबूरन बच्चों की उचित शिक्षा के लिए गांव से पलायन करना ही उचित समझा।

विद्यालय प्रबंधन समिति के अध्यक्ष राजेंद्र भट्ट का  कहना है कि विद्यालय में शिक्षण व्यवस्था किसी तरह पंचायत घर के आंगन के एक कमरे के कोने में ही बनाए रखने का प्रयास किया जा रहा है। अभिभावक सत्यनारायण, विनोद, का कहना है कि वर्तमान में गांव में वही बच्चे शिक्षण के लिए के लिए रुके हैं जिनके अभिभावक आर्थिक रूप से संपन्न नहीं है।

सरकार की उदासीनता के कारण लोग गांव से पलायन कर रहे हैं। सामाजिक कार्यकर्ता चिरंजीव भट्ट एवं ग्राम प्रधान रेखा  भट्ट का कहना है कि चार वर्षों से लगातार विद्यालय भवन निर्माण की मांग कर रहे हैं ङ्क्षकतु अभी तक भवन  के लिए धन स्वीकृत नहीं हुआ है। विधायक से लेकर शासन प्रशासन तक से मांग की गई है।

हर जगह आश्वासन ही मिलता रहता है। भवन के अभाव में काफी बच्चे पलायन कर गए हैं। ऐसी स्थिति में विद्यालय ही बंद होने के कगार पर पहुंच गया है। अब सबसे मुश्किल उन गरीब अभिभावकों के लिए है जो कि अपने बच्चों को कहीं बाहर पढ़ाने के लिए नहीं भेज सकते हैं।

जिला शिक्षाधिकारी (बेसिक) सुदर्शन बिष्ट का कहना है कि सर्व शिक्षा अभियान के अंतर्गत विद्यालय के लिए धन की मांग की गई है साढे बारह लाख का स्टीमेट निदेशालय भेजा गया है। क्षतिग्रस्त विद्यालयों को प्राथमिकता में रखा गया है। धन मिलते ही शीघ्र भवन निर्माण किया जाएगा।

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