लोस चुनाव: प्रेमनगर से जौनसार तक काफी कुछ डिपेंड करेगा।

जौनसार से तालुक रखने वाले श्री मुन्ना सिंह चौहान  तीन बार बार लोक सभा चुनाव लड़ चुके हैं। 98, 99 में समाजवादी पार्टी, 2009 में बहुजन समाज पार्टी से इन से ज्यादा कौन जानता होगा लोक सभा एरिया को। मतलब बारीकी से। तीनों बार हार मिली।

लेकिन अविभाजित उत्तर प्रदेश में 1991 में 6 हज़ार वोटों से , 1996 में 16 हज़ार वोटो से एमएलए का चुनाव  प्रीतम सिंह जी को मुन्ना सिंह चौहान ने क्रमसःजनता दल समाजवादी पार्टी, से हराया था।  उत्तर प्रदेश में ही प्रीतम सिंह 1993 का चुनाव कांग्रेस के टिकट पर जीत गए थे। उन्होंने मुना को 700 वोटों से हराया था। लेकिन जौनसार में इन्ही नेताओ के बीच राजनीति
मंडराने का समय आ गया था।

राज्य बना, तो मुन्ना सिंह जी ने उत्तराखंड को जनवादी स्वरूप में ढाँलने के लिए प्रयास किये। सिफर पर रहे।

उनका उदय बीजेपी में हुआ। वे 2007 में विकास नगर से एमएलए बन गए। उधर प्रीतम सिंह , अपने पिता की तरह उत्तराखंड बन जाने के बाद4 चुनाव में वहां से विधायक हैं। उनके पिता, का इतना कद था उत्तराखंड के पहले निर्वाचित चुनाव में वे मंत्री बन गए। 7 से 12 तक विपक्च मे रहे तो, बेस्ट एमएलए का खिताब जीत लिया। इसी में जारी है। 12 से 17 तक वे राज्य के होम मिनिस्टर भी रहे।

इधर मुन्ना भी मुखर विधायक हैं। त्रिवेंद्र जी के सामने यह चुनोती है कि वे मौजूदा समय मे मुन्ना प्रीतम के सामने खड़े रखते या नहीं।  मुन्ना अभी तक मंत्री नहीं बने। जबकि प्रीतम 17 साल पहले मंत्री बन गए थे। प्रेम नगर से जौनसार तक पहले एक विधानसभा थी।  चकराता। अब तीन हो गई। सहसपुर, विकास नगर, चकराता।अब मुन्ना की बड़ी भूमिका है। जौनसार से। वे विकास नगर से विधायक है। और पत्नी मधु चक राता में कुछ सौ वोट से हारी हुई हैं। मधु को दोबारा टिकट चाहिए, समय तय होने कामौका है।प्रीतम सिंह इस एरिया से बढ़त में है। लेकिन बेजेपी में जैसे उम्मीदवार तय हुवा वैसे ही या उससे पहले सहसपुर विधायक श्री सुखदेव पुंडीर ,राणी के पास सबसे पहले आ गए थे।

पुंडीर ने अपने छेत्र से दिगज्ज किशोर उपाध्याय आयेन्द्र शर्मा को 20 हज़ार से हराया था। सहसपुर का हीरा पुंडीर, राणी के उनके पास है। लेकिन मुस्लिम 40 हज़ार कांग्रेस के उम्मीदवार के साथ बताये जाते हैं।

फिर आती है कैंट , वहां बेजेपी एमएलए हरबंस कपूर है। वहां सूर्य कांत धस्माना की भी मजबूत पकड़ बताई जाती है।
वे भी प्रदेश कांग्रेस की टॉप लीडरशिप में है। यहां खजान दास, सिटिंग एमएलए हैं। वे राणी के किलाफ
बताए जाते हैं।राजपुर में राजकुमार प्रीतम के साथ हैं। उन्हें अपने लिए अच्छा परफॉर्मेंस देखना है। वोटों से हराया था।जौनसार के मूल निवासी और देश के बड़े लेखक श्री सुभाष तराण अपने लेख में कहते हैं कि जब तक जौनसार से जातिवाद, छेत्रवाद चूल्हा बाद नहीं हटेगा, तब तक भला सम्भव नहीं।उन्होंने पर्वत जन में जौनसार के बारे ऐतिहासिक लेख लिखा है।

गंगोत्री में विजय पाल सिंग सजवाण, प्रताप नगर में विक्रम सिंह नेगी, घन साली में विजय गुनसोला पीतम सिंह के लिए घर का पैसा भी लगा रहे हैं। लेकिन राणी का बेजेपी संगठन इतना मजबूत है कि , उनको सघन प्रचार किये फ़ायदा दे रहे हैं।फिर भी प्रीतम सिंह के नाम पर कांग्रेसी एक जुट हुए हैं। और वे 2022 में उन्हें किसी बड़े पद चीफ मिनिस्टर
नवाज़े जाने के बदले काम लेने के लिए, काम कर रहे हैं उत्तराखंड बन जाने के बाद, प्रीतम सिंह का ग्राफ बढ़ा है।
उन्हें 2002 से लोग मंत्री के रूप में पहचाने लगे।  फिर वे पीसीसी चीफ बने। इस वजह से उनकी
प्रदेश में पहचान हुई। उन से काफी लोग चिपकने लगे। जबकि माला राज्य लष्मी शाह, सांसद है। उनके पास
उस संगठन का हथियार है, जिसमें लोग एक जोड़ी कपड़ा पहन कर तीन तीन दिन तक प्रचार करते हैं।और मांगते कुछ नहीं।

जितनी राणी शिस्ट हैं उतने ही प्रीतम व्यवहारिक। देहरादून तय करेगा टिहरी गढ़वाल सांसद।

फिर आती है कैंट , वहां बेजेपी एमएलए हरबंस कपूर है।  वहां सूर्य कांत धस्माना की भी मजबूत पकड़ बताई जाती है।
वे भी प्रदेश कांग्रेस की टॉप लीडरशिप में है।  यहां खजान दास, सिटिंग एमएलए हैं। वे राणी के किलाफ
बताए जाते है

#शीशपालगुसाईं

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