आजादी से पहले लोक निर्माण मंत्री श्री खुशहाल सिंह रांगड़

टिहरी गढ़वाल राज्य ने कितने बड़े बड़े नेताओं को जन्म दिया, यह काबिले गौर है। खुशहाल सिंह रांगड़ का बॉयोडाटा उनमें सर्वोच्च है। उन्होंने मिलो पैदल चल कर राजनीति की। वो तब के मंत्री थे जब मोटर मार्ग नहीं थे। राजनीति में सदैव मर्यादा का ख्याल रखा।
पहाड़ चढ़ कर, लोगों के साथ खड़े रहे। लखनऊ में सरकारी काम काज के लिए , सत्र में भाग लेने के लिए आज़ादी के ठीक बाद से उपस्थित रही। उससे पहले जो पैसे टैक्स के रुप में राज्य को मिले उससे सड़के बनाई। वनों से टिहरी गढ़वाल स्टेट को भारी कर मिलता था। पहले यह कर राज महल में जमा होता था। कीर्तिनगर क्रांति के बाद बनी अलग स्टेट में सड़कों , विद्यालय पर खर्च किया गया। उसमें लोक निर्माण मंत्री रांगड़ जी भूमिका अहम थीं।

खुशहाल सिंह रांगड़ और त्रेपन सिंह नेगी में गहरी दोस्ती थीं।
रांगड़ जी का जन्म नेगी जी से 11 माह पहले हुआ। दोनो ने करीब 50 साल तक मजबूत जनप्रतिनिधियों का दायित्व निभाया।
और 1 महा 7 दिन पहले रांगड़ जी नेगी से पहले स्वर्ग चले गए थे।दोनों ने साथ साथ राजनीति की ,बड़ा राजनीतिक मुकाम हासिल किया।

9 जनवरी 1996 को श्री खुशहाल सिंह रांगड़,ने भागरथीपुरम में अपने बेटे श्री किशोर रांगड़ के यहाँ अंतिम सांस ली। शोक में आये
त्रेपन सिंह नेगी , एक पक्के दोस्त के जाने से इतने दुखी थे कि
चार घन्टे तक वह कुछ बोले ही नहीं। दुखी मन से लौट गए। आखिर दोस्त जो चला गया था, जिसके साथ- साथ राजनीति की।
कभी वो विधायक का टिकट लाये तो विरोध नहीं किया। प्रचार में जुट गए। 1 माह 7 दिन के बाद नेगी जी भी अपने दोस्त के साथ चले गए। उस अंतिम यात्रा में। साथ साथ पैदा हुए साथ साथ दुनिया से विदा ली।

स्वतँत्रता संग्राम सेनानी श्री खुशहाल सिंह रांगड़ ,का राजनीतिक जीवन परिचय बहुत शानदार रहा।वह राजनीतिक के ऐतिहासिक
व्यक्ति थे। आज के तीन जिलों की राजनीति में में उनकी गहरी छाप थीं। टिहरी गढ़वाल राज्य में वे 14 फरबरी 1948 से 1 अगस्त 1949 तक लोक निर्माण मंत्री रहे। 1952 से 1966 तक वे विधान परिषद के सदस्य रहे। 1975 से 1977 तक जिला परिषद के अध्यक्ष रहे। 1980 से 1984 तक टिहरी विधायक रहे। 1955 से 1968 तक कांग्रेस के जिलाध्यक्ष रहे। गढ़वाल में कांग्रेस के संस्थापको में उनका नाम लिया जाता है। यातायात , पर्यटन, सहकारी संघ के अध्यक्ष रहे। इससे पहले 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में रांगड़ जी जेल में रहे।

खुशहाल सिंह रांगड़ का जिस दिन देहांत हुआ, उस दिन टिहरी उत्तर काशी बहुत दुखी हुआ। लोगों का आज भी मानना है कि रांगड़ जैसा राजनीतिक व्यक्तित्व मिलना मुश्किल है। वे साधारण ढंग से जीवन व्यतीत करते थे। घोर ईमानदार थे। गांधीवाद विचारधारा उन्होंने जीवन भर निभाई। भलडियाना से लंबगांव मोटर मार्ग रांगड़ की देन है। लंबगांव छेत्र में शिक्षा की रोशनी ले जाने वही थे।

आज प्रतापनगर के विश्वकर्मा जो हर जगह उपलब्ध है,उनके विकास की नींव ,रांगड़ का आज़ादी से पहले लोक निर्माण मंत्री बनना अहम था। जो वयक्ति 50 साल तक मंत्री, एम एल ए, एम एल सी, जिला परिषद अध्यक्ष, चेयरमैन, रहे उन्होंने जिंदगी अपने नहीं जिये, दूसरों के लिए समर्पित रहे।

नई दिल्ली, लखनऊ वो साथ साथ टिकट के लिए जाते थे। एक को मिलता, तो दूसरे के प्रति कटुता नहीं रखते थे। सिद्धानतवाद, बचनबद्धता उनके कदम कदम में थीं। रांगड़ जैसे महान व्यक्तित्व
को हमारा सलाम।

by- शीशपाल गुसाईं

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