श्री गुलाब सिंह, पहाड़ का बड़ा राजनेता, 9 बार विधायक रहे

उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड में 1985 में निर्विरोध विधायक चुने जाने का रिकॉर्ड,

नेहरू गांधी की तीन पीढ़ी के खास रहे

जौनसार को जनजाती कराने का अहम योगदान 

उत्तर प्रदेश का तब पहाड़ और अब उत्तराखंड में पहले कितने बड़े बड़े नेता पैदा हुए। कुछ चुनिंदा नेताओं में हैं जौनसार के गुलाब सिंह। 1952 में नेहरू जी सांसद बने तो चकराता से गुलाब सिंह विधायक बने। गुलाब सिंह कांग्रेसी थे। तब कांग्रेस ही थीं।
वे 1957 , 1962 , 1967, 1969, 1974, 1980, 1985, 1989 में विधायक चुने गए। जो अपने आप में रिकॉर्ड है।
और इतिहास है।
इसमें एक बार वह 1977 में वे श्री शूरवीर सिंह चौहान से चुनाव हारे। इमरजेंसी के दौर में जनता पार्टी की लहर थीं। शूरवीर सिंह जी चरण सिंह जी के प्रत्याशी थे। फिर 1985 में शूरवीर सिंह ने पर्चा भर लिया था। लेकिन किसी कारण वापस ले लिया। इस कारण गुलाब सिंह के नाम निर्विरोध एमएलए चुने जाने का रिकॉर्ड है।गुलाब सिंह जी ने जवाहरलाल नेहरू , इंदिरा गांधी, राजीव गांधी के साथ काम किया। इसमें कहा जाता है इंदिरा गांधी तो उन्हें
व्यक्तिगत रूप से जानती थी। और उनकी बात मानती थीं।

1962 में जब देश का चीन के साथ युद्ध हुआ, तब यह आशंका थीं कि सीमांत जाती के कुछ लोग चीन में शामिल हो सकते हैं। इसी आशंका को ध्यान में रखते हुए , केंद्र सरकार ने सांसदों की कमेटी बनाई। जिसमें यूपी के विधायक खुद गुलाब सिंह शामिल थे।
थारू, बुक्सा, भोटिया, तो चीन से लगे थे ही। लेकिन जौनसारी को गुलाब सिंह की ज्ञानता, चतुरता के कारण जनजाती में शामिल किया गया। मोरी से यमुना पुल तक काफी प्रबन्ध किये थे। कमेटी ने पूरे इलाके को पिछड़ा पाया। इधर गुलाब सिंह उन्हें आगे करते रहे।

उत्तर प्रदेश की 5 जाती 24 जून 1967 को एसटी भारत सरकार ने शामिल कर दी। उसमें गुलाब सिंह का बहुत योगदान माना जाता है। गुलाब सिंह के कारण जौनसारी दो लाभ ले रहे हैं एक लाभ ठाकुर पंडित का, जिनका रिस्ता ऊंची जाति से है। दूसरा एसटी का। जन जाती होने के कारण, वहां के काफी लोग सरकारी नोकरी में है। बैंक पीओ, जज वहां सबसे ज्यादा है। यह एक सर्वे है।
गुलाब सिंह बहुत दूर गामी वाले व्यक्ति प्रतीत होते हैं। उनके एरिये के बगल में जैसे हिमाचल स्टेट है वैसे यदि उस दौर में उत्तराखंड होता, वे मुख्यमंत्री होते। फिर वे चकराता से बाहर अस्कोट की भी सोचते।

जब 1967 में जनजाति छेत्र घोषित हुआ, उस से पहले गुलाब सिंह
काठगोदाम में रेलवे स्टेशन में पहले खड़े थे अपनी कमेटी की अगवानी में। वे उन्हें पिथौरागढ़, चमोली ले गए। फिर अपने गढ़ में जहाँ वे अजेय रहे। गुलाब सिंह की अपने इलाके में इतनी चलती थी कि, उन्होंने अपने मित्र राजेंद्र सिंह को कहा था कि आपको ब्लॉक प्रमुख बनना है। उन्होंने ना कर दिया। उन्होंने कहा यह गुलाब सिंह का फैसला है। मित्र को मानना पडेगा।1982 में सहसपुर के श्री राजेन्द्र सिंह ब्लॉक प्रमुख बन गए। ब्रह्म दत्त जी के कैंडिडेट बूढ़ी गांव के भूरे खान की मात खानी पड़ी।

पहली फोटो श्री जवाहरलाल नेहरू को रास्ता दिखाते गुलाब सिंह
दूसरी फोटो श्री इंदिरा गांधी को उंगली से बताते गुलाब सिंह
तीसरी फोटो श्री राजीव गांधी को जनसभा में ले जाते गुलाब सिंह।
By – शीशपाल गुसाईं

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