सवाय होटल। अब हो गया है वैलकम सवाय होटल मसूरी

सवाय होटल। अब हो गया है वैलकम सवाय होटल मसूरी।
अंग्रेजो ने लंदन के मशहूर सवाय होटल के नाम से मसूरी में भी 1890 में होटल खोला था। इसमें 116 कमरे हैं।मसूरी ही अंग्रेजो ने बसाया था। तो होटल तो उनकी निशानी थीं ही। 1900 के शुरुआती दौर में इसमें अंग्रेज महिला की हत्या हो गई थी। जिससे वहां ठहरते लोगों में इसकी आत्मा दिखाई देने लगी।जब कस्टमर ज्यादा परेशान हो रहे थे तब इसको कुछ साल बंद भी होना पड़ा।

लेकिन अब काफी सालों से सवाय आईटीसी ग्रुप के पास है। अब आत्मा की कोई बात नहीं है। लेकिन यह होटल मसूरी का ऐतिहासिक है। डेढ़ दो सौ साल पहले यहां सर्विस पाना बहुत कठिन था। जो यहाँ सर्विस में रहता था वह पट्टी, कस्बे में ऐसी सर्विस होती थी जैसे आज आईआईटी, की जॉब।

यह होटल आज तब प्रकाश में आया जब यहां कल रविवार को हिमालय कॉन्क्लेव हो रही है। कॉन्क्लेव मतलब हिमालयी राज्य एक मंच पर आ रहे हैं। और अपने विकास की रौशनी साझा करेंगे।
आज शनिवार को हिमालयी राज्यों के मुख्यमंत्री इसमें ठहरेंगे।

कल के बाद, मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के बायोडाटा में एक पंक्ति और जुड़ जायेगी। क्योंकि वे इस कार्यक्रम के आयोजक हैं
लेकिन हिमालय के गांव और खेतों में जंगली जानवरों का जो आतंक है, वह फसल चौपट कर रहे हैं। उस पर सोचे। पलायन रोकने पर ठोस बात हो। फालतू की नहीं। पहाड़ो पर ऐसे उधोग लगे जैसे रोजगार गारंटी में आम लोगों दिहाड़ी मिलती है।
बिजली परियोजना शुरू हो, लेकिन स्थानीय उत्तरखण्डी लोगों को
बिजली यूनिट में 50% की रियायत मिले।

हिमालय में सिंधु नदी भी और ब्रह्मपुत्र भी। उससे पहले हम अपनी गंगा नदी के बारे में सोच ले। इसके पाणी को हम कितना प्रयोग में ला रहे हैं ? सदियों से बह रही है। जब इसके प्रयोग में लाने की बाते चलती है तब नई दिल्ली मैं बैठे एनजीओ मठाधीस उत्तराखण्ड आ धमकते हैं।

हम हिमाचल की बराबरी करते हैं यह ठीक है हिमाचल हम से कहीं पहले 15 अप्रैल 1948 को केंद्र शासित प्रदेश बन गया था। लेकिन वहां की कार्य प्रणाली, संस्कृति पर जाने, पहचानने की जरूरत है।
हिमाचल के सर्विस क्लास लोग शनिवार को इतवार की छुट्टी के लिए गांव जाते हैं, हमारे कर्मी नीचे देहरादून, ऋषिकेश, हरिद्वार, हल्द्वानी, रामनगर, काशीपुर, ऊधम सिंह नगर उतर आते हैं।
कभी कभी मंगलवार, बुधवार को पहाड़ दफ्तर गुलजार होते हैं।

पर्यटन की भी अपार संभावनाये हैं। प्रकृति ने दिल खोलकर उत्तराखण्ड को तराशा है। लेकिन अब जरूरत के हिसाब से
पहाड़ के अच्छे टूरिस्ट स्पॉट को सँवारे जाने की आवश्यकता है।
13 टूरिस्ट डेस्टिनेशन जरूर बनाने की घोषणा टिहरी केबिनेट में
जरूर हुई था। लेकिन आगे कितना काम हुआ। पढ़ने को नहीं मिलता है।

लेकिन कद्दू खाल से सुरकंडा देवी तक रज्जू मार्ग का काम रुका हुआ है। सुरकंडा देवी से 500 परिवारों को प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष रूप से रोज गार मिल रहा। जो रज्जू मार्ग बन जाने से दोगुनी आया हो जायेगी। और भी होंगे। जिस पर आगे काम नहीं हो पा रहा है।
ऐसे मंत्री भी बहुत हैं जिनके पास अच्छे विभाग है लेकिन वह काम मे रुचि नहीं ले रहे हैं। इस फिजूल बात में अपनी राते खराब कर देते हैं कि त्रिवेंद्र कैसे हिमालय का हीरो होने जा रहा है।

यह मान ले हीरो वही होता ,जो कुछ करता है। कार्यकाल समाप्ति के बाद, मूल्यांकन होता है। केन्द्र को पर्यटन के लिए 5000 करोड़ का पैकेज देने की आवश्यकता है। इस 5 हज़ार करोड़ में केंद्र ऐसी निगरानी करें, जैसे ऑल वेदर रोड़ में कर रहा है।

मोदी जी का समय बीतता जा रहा है।अब शाह जी का आ रहा है।
बात एक ही है। लेकिन 19, 20 साल के उत्तराखण्डी बालक को पैकेज चाहिए। इस विंदु का नीति आयोग उपाध्यक्ष , वित्त मंत्री संज्ञान ले।

फोटो आज के हैं । श्री के एस चौहान जी की वाल से

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