स्कूलों में छात्र संख्या कम होने से टिहरी जिले के 142 प्राइमरी स्कूल और 22 जूनियर स्कूल हुए बंद

सरकारी स्कूलों के बंद होने का सिलसिला निरंतर जारी है। छात्र संख्या कम होने पर जिन प्राथमिक स्कूलों को बंद कर दिया गया है, उनका आंकड़ा शतक पार कर गया है और अन्य कई स्कूल भी बंदी की कगार पर हैं। इसके साथ ही 22 जूनियर हाईस्कूल भी बंद हो चुके हैं।

टिहरी जिले में प्राथमिक में तो कई विद्यालय ऐसे हैं, जिनमें छात्रसंख्या शून्य हो गई थी। स्कूलों के बंद होने के कारण विद्यालय भवन वीरान पड़े हैं। जहां सात-आठ साल पहले अच्छी-खासी छात्र संख्या हुआ करती थी, वहां वर्तमान में छात्र संख्या दहाई से कम होने के कारण बंद हो गए और शिक्षा के यह मंदिर सुनसान नजर आ रहे हैं।

सरकार बुनियादी शिक्षा में सुधार की बात करती है और शिक्षा में गुणात्मक सुधार के लिए कई अभिनव प्रयोग भी किए जा रहे हैं, लेकिन जिस तेजी के साथ स्कूल बंद हो रहे हैं। इससे सरकारी शिक्षा की पोल खुल रही है
टिहरी जिले में 1474 प्राथमिक विद्यालय हैं, जिनमें से 142 विद्यालय छात्र संख्या कम होने पर बंद हो गए। इसके अलावा, तीन सौ से अधिक जूनियर विद्यालय हैं, जिनमें 22 विद्यालय बंद हो चुके हैं। बंद होने वाले विद्यालयों की सबसे ज्यादा संख्या भिलंगना व प्रतापनगर में है।

प्राथमिक के अन्य विद्यालय भी बंदी के कगार पर हैं। दस से कम संख्या वाले स्कूलों को बंद करने की योजना थी, लेकिन अधिकांश विद्यालय में छात्रसंख्या शून्य हो गई थी। कई अन्य विद्यालय इसी श्रेणी में पहुंचने वाले हैं, यहां भी छात्रसंख्या घट रही है। तमाम प्रयासों के बाद भी सरकारी स्कूलों में बच्चों का ठहराव नहीं हो रहा है।

सरकार ने सरकारी स्कूलों में छात्र संख्या बढ़ाने के लिए कई योजनाएं संचालित की है। इनमें मुफ्त पुस्तकें, ड्रेस, दोपहर का भोजन आदि शामिल हैं। इसके अलावा अभी कुछ साल पूर्व कुछ विद्यालयों को मॉडल विद्यालय भी बनाया गया था। इसके बावजूद स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ और मॉडल स्कूल भी बस नाम के रह गए हैं।

शिक्षकों की कमी, सुविधाओं का अभाव व शिक्षा का स्तर न सुधरना भी इसका एक कारण है। जिन शिक्षा के मंदिरों में चहल-पहल होती थी, वह आज बिना छात्रों के वीरान हो गए हैं। तमाम कोशिशों के बाद भी अभिभावकों का सरकारी स्कूलों से मोहभंग होने लगा है।

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