अखिलेश यादव बोले- मैं प्रधानमंत्री की दौड़ में नहीं हूँ ‘

सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष व यूपी के पूर्व सीएम अखिलेश यादव आत्मविश्वास से लबरेज हैं। गठबंधन की संभावनाओं की बात छिड़ते ही उनकी आंखों में चमक आ जाती है, लेकिन शब्द बेहद सधे हुए। आजमगढ़ में प्रस्तावित चार जनसभाएं रद्द हो जाने के बाद शुक्रवार को वे सपा के प्रदेश कार्यालय आए। अब तक के रुझान से उत्साहित अखिलेश कहते हैं, गठबंधन को दिख रहे समर्थन की वजह से ही भाजपा की भाषा बदल गई है। पीएम पद के सवाल पर बोले- पिछला प्रधानमंत्री यूपी ने दिया था, अगला पीएम भी उत्तर प्रदेश ही देगा।

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से राजेंद्र सिंह की विशेष बातचीत

पांच चरणों के बाद सपा-बसपा-रालोद गठबंधन कहां खड़ा है?

पांचवें चरण तक जितनी भी सीटों पर चुनाव हुए हैं, उनमें गठबंधन को सबसे ज्यादा समर्थन मिलने जा रहा है। विरोधियों की भाषा ही बता रही है कि गठबंधन के आगे भाजपा कहीं नहीं टिक रही। वे असली मुद्दों से भटक गए हैं, उन्हें याद नहीं रहा कि 2014 में क्या वादे किए थे? किसानों, गरीबों, युवाओं और व्यापारियों ने पहले चरण से ही मन बना लिया था। गुस्साई जनता को बस वोटिंग का इंतजार का था। प्रदेश में भाजपा और उसके सहयोगी सिंगल डिजिट तक सिमट जाएंगे।

प्रत्याशी चयन में सोशल इंजीनियरिंग की झलक
डॉ. भीमराव आंबेडकर और डॉ. राम मनोहर लोहिया मिलकर काम करना चाहते थे। उन्हें साथ काम करने का अवसर नहीं मिला। एक कोशिश नेताजी (मुलायम सिंह यादव) और कांशीराम ने की थी, पर यह साथ लंबा नहीं चला। अब हमें मौका मिला है तो आंबेडकर व लोहिया का काम आगे बढ़ाएंगे। कौन किस जाति में पैदा हुआ, यह कोई खुद तय नहीं कर सकता। समाजवादी लोग गरीब, कमजोर के बारे में सोचते हैं, इसलिए समाजवादी जातिवादी नहीं हैं। यही हमारी सोशल इंजीनियरिंग है।

चुनाव में हो रहा जाति-धर्म का इस्तेमाल 
जाति-धर्म के नाम पर नफरत भाजपा ने फैलाई। पिछले चुनाव में जालौन व झांसी की सभाओं में नरेंद्र मोदी ने एक खास जाति की तरफ इशारा करते हुए कहा था कि उन्हें मालूम है, थाने कौन चलाता है। उन्होंने जाति-धर्म के नाम पर दुष्प्रचार कर बहकाया।

राष्ट्रीय सुरक्षा, राष्ट्रवाद, धार्मिक-जातीय ध्रुवीकरण तो हावी नहीं हो रहा?
भाजपा को इनका लाभ नहीं मिलने वाला है। बताने के लिए कोई काम नहीं है, इसलिए ऐसे मुद्दे उठाए जा रहे। राष्ट्रवाद केवल वोट लेने के लिए नहीं है। बताएं-कितनी बड़ी सड़कें, कितने बड़े अस्पताल बनाए? जवान 50 डिग्री से लेकर माइनस 30-40 डिग्री तक के मौसम में तैनात रहते हैं। उन्हें यूनिफॉर्म और बुलेटप्रूफ जैकेट मिलीं? ये है असली राष्ट्रवाद। वाराणसी में एक जवान के चुनाव लड़ने से डर गए। उसने खाने की शिकायत की तो, बर्खास्त कर दिया।

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