विलय के विरोध करने के लिए सड़क पर उतरे बैंककर्मी

ऋषिकेश यूनिट के उत्तरांचल बैंक इंप्लाइज यूनियन से जुड़े सदस्यों ने यूनाइटेड फोरम आफ बैंक यूनियन के बैनर तले केंद्र सरकार के प्रस्तावित बैंकों में विलय करने के निर्णय पर विरोध जताया है। शनिवार को यूनियन के सभी सदस्यों ने दिन भर काली पट्टी बांधकर काम किया और शाम को हरिद्वार रोड स्थित पंजाब नेशनल बैंक के बाहर एकत्र हुए। यहां सभी सदस्यों ने केंद्र सरकार पर तानाशाही का आरोप लगाया और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

यूनियन के जिला महासचिव मयंक शर्मा ने बताया कि सरकार वित्तीय सुधारों के नाम पर पब्लिक सेक्टर बैंकों को बेचने का प्रयास कर रही है, जो सरासर गलत है। उन्होंने बताया कि सरकारी बैंक अर्थव्यवस्था की रीढ हैं। सरकार को चाहिए वह सरकारी बैंकों को मजबूत बनाएं ताकि जनता वित्तीय समावेशन का अधिकतम लाभ ले सके। बैंकों के विलय से शाखाएं बंद होंगी और आम जनमानस प्रभावित होगा। कर्मचारियों की छंटनी होगी और नई भर्तियां बंद हो जाएंगी। यह सब देश की डूबती अर्थव्यवस्था को ज्यादा प्रभावित करेगा। इसके विपरीत सरकार को सरकारी बैंकों को मजबूत बनाने के लिए बैंकों को बढ़ते एनपीए को रोकने और उनकी वसूली के लिए सख्त कानून बनाने चाहिए।
सभी बैंकों के बैंककर्मियों ने मांग की कि सरकार वित्तीय सुधारों के नाम पर बैंकों का विलय तुरंत बंद करे और सरकारी बैंकों को मजबूत बनाये। सरकार श्रम कानूनों में सुधार के नाम पर बैंककर्मियों के हितों को ध्यान में नहीं रख रही है, जो गलत है। सरकार को तत्काल अपने इस निर्णय पर रोक लगानी चाहिए। अन्यथा देश के सभी बैंक कर्मचारी अपना विरोध बढ़ाकर हड़तालों पर चले जाएंगे। प्रदर्शन करने वालों मेें राजकुमार, संजय शर्मा, डीएस रावत, सुरेश भट्ट, रवि भट्ट, पुरुषोत्तम लखेड़ा, केके रतूड़ी आदि उपस्थित थे।

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