घस्यारी कल्याण योजना से पहाड़ में बड़ा परिवर्तन, पहली बार बजट में 25 करोड़ रुपए का प्रावधान

मुख्यमंत्री घस्यारी कल्याण योजना से पहाड़ में बड़ा परिवर्तन आयेगा, पहली बार 25 करोड़ रुपए का किया गया बजट में प्रावधान

उत्तराखण्ड राज्य के मुख्यमंत्री जी ने
गैरसैंण में कहा कि मुख्यमंत्री घस्यारी कल्याण योजना से समाज में बहुत बड़ा परिवर्तन आएगा. भले तत्काल इसका असर नजर न आए, इसके लिए सरकार को तमाम व्यवस्था करनी पड़ेंगी. उन्होंने कहा कि हमारे किसान जो धान और गेहूं पैदा करते हैं. उन्हें घास प्रजाति की मक्का, जई व बरसीन बोने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा. ऐसे में अनाज से ज्यादा पैसा वह इन फसलों से ले सकते हैं. फेयर प्राइस शॉप के माध्यम से जिलों में घास को पहुंचाया जाएगा. एक ओर जहां घास बोने से तो पैकिंग से भी इनकम होगी. इस योजना के लिए पहली बार मुख्यमंत्री जी की महत्वकांक्षी **स्वास्थ्य पशुधन गौरवान्वित महिलाएं**
एवं राज्य के पशुपालकों को पोषण प्रणाली में हो रहे प्रौद्योगिक विकास से जोड़ते हुए कल्याणकारी योजना **मुख्यमंत्री घस्यारी कल्याणी योजना ** का शुभारंभ किया जाना प्रस्तावित है।

उत्तराखण्ड के कॉपरेटिव मंत्री डॉ धन सिंह रावत भी महिलाओं का घास का बोझ कम हो, इस पर खासी रुचि ले रहे हैं। उनके द्वारा महिलाओं को पशुपालन की ट्रेंनिग दी जा रही है। ताकि उन्हें 55 हज़ार तक की गाय निःशुल्क सहकारिता विभाग दे सके।

लेकिन मुख्यमंत्री घस्यारी कल्याण योजना महिलाओं के लिए वरदान साबित होने जा रही है।इस योजना के अंतर्गत उत्तराखंड में दूरस्थ ग्रामीण पर्वतीय क्षेत्रों में पशुपालकों को पैक्ड साइलेज एवं टीएमआर संपूर्ण मिश्रित पशुआहार उनके घर-घर तक पहुंचाना है। इस योजना का उद्देश्य एक लाख से अधिक लाभार्थियों को लाभान्वित करना है जिनमें विशेषकर महिलाएं शामिल हैं जिनके द्वारा रियायती दरों पर साइलेज एवं टीएमआरसी फीड ब्लॉक प्राप्त कर चारा काटने के कार्य से मुक्त किया जाना है। इस योजना से किसानों द्वारा पौष्टिक पशु चारे के उपयोग में वृद्धि होगी एवं पशुओं के स्वास्थ्य और दूध की पैदावार में दोहरा लाभ होगा। यह योजना साइलेज उत्पादन एवं विपणन सहकारी संघ लिमिटेड (SIFED) के द्वारा संचालित की जाएगी। जो कि मक्के की संयुक्त सहकारी खेती कराई जाने वाली एम- पैक्स की केंद्रीय सहकारी संस्था है।

मुख्य विशेषताएं

प्रस्तावित योजना में राज्य के लाभार्थियों/ पशुपालकों को सायलेज / टीएमआर/ चारा ब्लॉक रियायती दर पर उपलब्ध कराया जाएगा।
इस योजना के तहत लगभग 2000 से अधिक कृषक परिवारों को उनकी 2000 एकड़ से अधिक भूमि पर मक्का की सामूहिक सहकारी खेती से जोड़ा जाएगा

वित्तीय वर्ष 2021 -22 में 10 हजार मैट्रिक टन उत्पादन और आपूर्ति का लक्ष्य रखा गया है

प्रस्तावित योजना में किसानों को सायलेज एवं टीएमआर
की आपूर्ति हेतु पशचातवर्तीय उत्पादन अनुदान के रूप में वर्ष 2021- 22 के लिए 10.25 करोड़ की आवश्यकता होगी।

इसयोजना के तहत एक ओर जहां मक्का उत्पादक किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाए जाने की व्यवस्था की गई है उसके साथ ही राज्य अंतर्गत की संपूर्ण मूल्य श्रंखला {Complete value chain} स्थापित कर पशुपालकों को गुणवत्ता युक्त सायलेज /टीएमआर उपलब्ध होगा एवं पर्वतीय महिलाओं के कंधों से घास के गट्ठर का बोझ भी उतारा जा सकेगा

उद्देश्य

चारा काटने से महिलाओं को होने वाली घटनाएं कठिन परिस्थितियों का निवारण करना।

चारा काटने में लगी हुई ग्रामीण पर्वतीय महिलाओं के कार्य बोझ, दुर्घटना संबंधी परेशानियों एवं अनावश्यक
श्रम से बचाव।

फसल के अवशेषों और फॉरेज (Forage) को वैज्ञानिक संरक्षण द्वारा राज्य में चारे की कमी को दूर करना।

फसल के अवशेषों को जलाने के कारण होने वाले पर्यावरणीय दुष्परिणामों को कम करना

पशुओं के स्वास्थ्य में सुधार और दूध की पैदावार में वृद्धि करके कृषकों की आय में बढ़ोतरी करना

सामाजिक और आर्थिक प्रभाव

मक्के की सहकारी खेती करने वाले डेयरी किसानों की आय में वृद्धि के माध्यम से इस योजना का बहुआयामी प्रभाव पड़ेगा

सायलेज एवं टीएमआर की महिलाएं महिलाओं तक आसान पहुंच होने के कारण उनके समय की काफी बचत होगी जिसका उपयोग वह अन्य आय सृजन गतिविधियों में कर सकेंगी

मक्का की सामूहिक सहकारी खेती के फल स्वरुप किसानों के लिए अतिरिक्त आय के अवसर विकसित हो रहे हैं

इस योजना के अंतर्गत एम- पैक्स के माध्यम से किसानों को कृषि उपकरण, कृषि ऋण , बीज उर्वरक इत्यादि की व्यवस्था कराए जाने के साथ ही उनकी उपज का आवश्यक रूप से क्रय भी किया जाना प्रस्तावित है

मक्के की खेती में कम समय लगने के कारण सायलेज एवं टीएमआर मक्के की फसल लगभग 90 से 120 दिनों में तैयार हो जाती है जिस कारण कृषक तिलहन एवं सब्जियों के अगेती बुवाई पर अतिरिक्त लाभ अर्जित कर सकते हैं

सायलेज एवं टीएमआर जैसे संतुलित आहार के परिणाम स्वरुप दूध में वसा की मात्रा 1 से 1.5 प्रतिशत बढ़ने के साथ-साथ दूध उत्पादन की मात्रा में 15 से 20 प्रतिशत तक की वृद्धि संभावित होती है जो पशुपालकों के अतिरिक्त आय अर्जन में सहायक सिद्ध होगी

उक्त योजना के अंतर्गत सायलेज उत्पादन एवं विपणन सहकारी संघ लि0 द्वारा उत्पादित सायलेज एवं टीएमआर राज्य के पशुपालकों को रियायती दर पर उपलब्ध कराए जाने हेतु विक्रय मूल्य का 50% अनुदान दिया जाना प्रस्तावित है

जिससे कि उक्त योजना का पशुपालकों द्वारा अधिकाधिक उपयोग करते हुए जहां एक और पशुपालन में अधिक आय अर्जित की जा सकेगी वहीं दूसरी ओर महिलाओं के कंधों से घास का बोध हटकर निर्धारित उद्देश्यों की प्राप्ति में सफलता मिलेगी। जिसके लिए वित्तीय वर्ष 2021 -22 में रियायती दरों पर किसानों को सायलेज एवं टीएमआर की आपूर्ति हेतु पश चातवर्तीय उत्पादन अनुदान के रूप में 10 . 25 करोड़ की आवश्यकता होगी

क्रियान्वयन

योजना का क्रियान्वयन राज्य में पंजीकृत सहकारी संस्था सायलेज उत्पादन एवं विपणन सहकारी संघ लि0 देहरादून
{SIFED} द्वारा किया जाएगा. SIFED उक्त योजना के लक्ष्य को पूर्ण करने के लिए मक्के की संयुक्त सहकारी खेती साइलेज एवं पशु चारा उत्पादन इकाई की स्थापना एवं पशुपालकों को उपलब्ध कराने के लिए उत्पाद वितरण प्रणाली की व्यवस्था किए जाने के लिए पूर्ण रूप से उत्तरदायी होगा। योजना को पशुपालकों के लिए सर्वोपयोगी बनाये जाने के लिए कुशल एवं दक्ष उत्पाद वितरण प्रणाली की व्यवस्था कराए जाने का दायित्व का निर्वहन SIFED द्वारा किया जाएगा।

जिसके लिए 670 बहुद्देशीय सहकारी समितियां, 1000 से अधिक राशन की दुकाने , यू0एल0डी0बी0, यू0 सी0डी0एफ0 पशुपालन विभाग के चारा बैंक एवं अन्य पूर्व स्थापित सरकारी विपणन केंद्रों का उपयोग करते हुए एक कुशल वितरण प्रणाली स्थापित किया जाना प्रस्तावित है। SIFED के आर्थिक लाभ के अनुदानित सायलेज एवं टी0एम0आर0 की राज्य में उपयोगिता के पश्चात अवशेष उत्पाद की बिक्री व्यवसायिक रूप से किया जाना प्रस्तावित है जिससे कि मक्के की खेती करने वाले किसानों को भी अधिक से अधिक लाभान्वित किया जा सके।

 

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