इस बार के कोरोना संक्रमण से अनगिनत परिवारों पर वज्रपात पड़ा है। जिसकी भरपाई सालों तक नहीं हो पायेगी। 

जाख जसपुर गांव ( चम्बा ) के  मदन सिंह गुसाईं, हाल निवासी रेसकोर्स देहरादून को कोरोना ने छीन लिया। गुसाईं परिवार के लिए इतनी विपदा आई कि, 9 तारीख को उनके छोटे भाई  मोहन  गुसाईं( कारगी ) और 12 तारीख को सबसे छोटे भाई सोहन गुसाईं (जीएमएस रोड़ )कोरोना संक्रमण से चल दिये।अब कल शाम को खुद श्री मदन सिंह गुसाईं ने संसार विदा ले ली। कितना खराब समय है यह। कोरोना डेथ पर सगा परिजन, रिश्तेदार तक न पास जा कर विलाप कर पा रहा है, न अंत्येष्टि में शामिल हो पा रहा। 

गुसाईं जी बड़े इंजीनियर थे। एक दिन कोटेश्वर बांध में उनसे पूरे दिन मुलाकात हुई थी। वह दिन उन्होंने मेरे लिए आरक्षित रखा था। उसी दिन मैं तकनीकी रूप से कोटेश्वर डैम को समझ पाया था। फिर एक आध बार रेसकोर्स में फोन पर वार्ता हुई। लेकिन वह हैं यह उपस्थित रहती थी।आज से 20 साल पहले किसी केंद्र सरकार के कारपोरेशन में जीएम परियोजना होना बड़ी पोस्ट माना जाता था। टीएचडीसी की टिहरी परियोजना की 400 MW की कोटेश्वर बांध को सफलतापूर्वक बनाने में मदन सिंह गुसाईं की भूमिका अहम रही। फिर उन्होंने टीएचडीसी छोड़ दी और केंद्र के बड़े उपक्रम कोलकाता में एमडी पद पर कार्य करने चले गए थे। 

उनकी बेटी डॉक्टर राखी गुसाईं, और उनके पति मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ. अमित राय नई टिहरी में कोविड संक्रमितों का इलाज कर रहे हैं। बहु स्वर्णिमा गुसाईं राट्रीय स्तर की शास्त्रीय संगीत गायिका है। मैंने स्वर्णिमा का इतिहास लिखा है। वह एक काबिल और अनुभवी व्यक्ति थे। जो इंजीनियरिंग के क्षेत्र में हमेशा याद किए जाते रहेंगे। 

विनम्र श्रद्धांजलि।

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