सीक्रेट सुपरस्टार से ‘घोषित विलेन’ तक, क्या उसने हम फैंस को धोखा दिया : जायरा वसीम

दंगल फिल्म में एक सीन है। महावीर फोगाट अपनी दोनों बेटियों के बाल कटवा देते हैं। फोगाट परिवार और बेटियों पर समाज ताने मारता है। तानों को नजरअंदाज कर गीता और बबिता नाम की दो लड़कियां अपनी मंजिल पाती हैं। ताने मारने वाले गांव की गलियों में ही रह जाते हैं। ‘सीक्रेट सुपरस्टार’ में खुद लड़की जिद करती है। पिता से सीधी टक्कर लेती है। मंजिल पाती है। अपनी दोनों ही फिल्मों में शोहरत की मंजिल के लिए लड़ने वाली जायरा वसीम अब कह रही है कि ये उसकी मंजिल नहीं।

अब लोग उससे लड़ रहे हैं। जबरन उसे उसकी मंजिल बता रहे हैं। जबकि अपने पोस्ट के पहले ही पैरे में जायरा लिखती है कि उसे जो बेपनाह शोहरत मिली वह वो नहीं है, जिसे वह (जायरा) वास्तव में कामयाबी या नाकामी मानती है। जायरा कहती है कि मैं काफी समय से खुद को समझाती भी रही कि ये जो दुनिया है वह ठीक है। सब ठीक हो जाएगा। लेकिन उसे लगा कि ये जो माहौल है वह उसे उसके ईमान से दूर ले जा रहा है। ध्यान रहे जायरा ने पूरे माहौल की बात की है। लोगों ने ये निष्कर्ष निकाला है कि जायरा ने एक्टिंग की विधा को इस्लाम के खिलाफ माना है। जबकि एक्टिंग की विधा और फिल्म इंडस्ट्री के माहौल के बीच एक बड़ा फर्क है। और ध्यान रहे कि इंडस्ट्री के इस माहौल पर पहले ही कई सवाल रहे हैं। यहां उसमें जाने की जरूरत नहीं है, लेकिन याद जरूर रहे।

जिनकी जहां तक दृष्टि जा सकती है

रवीना टंडन को लगता है कि जायरा को इंडस्ट्री ने क्या कुछ नहीं दिया। रवीना के लिए वह सिर्फ दो फिल्मों वाली लड़की है। रवीना उसे जाने देने की सलाह देते हुए उसे अहसान फरामोश (इस शब्द का इस्तेमाल रवीना ने नहीं किया है लेकिन भाव शायद यही है) कह सकती हैं। इसमें रवीना की कोई गलती भी नहीं है। वह जिस भौतिकवादी और ग्लैमर की दुनिया से आती हैं उसमें कुछ मिलने या पाने का मोटे तौर पर दो ही पैमाना है। दौलत और शोहरत। और बेशक, जायरा को ये दोनों ही चीजें बहुत कम समय में मिल गई थीं। इस बात से जायरा मना भी कहां कर रही है। सोशल मीडिया पर अपने लंबे पोस्ट में जायरा भी ऐसा ही कुछ लिखती है- “5 साल पहले मैंने एक फैसला किया। इस फैसले ने मेरी जिंदगी हमेशा के लिए बदल दी। मुझे बेइंतहां लोकप्रियता मिली। मुझे युवाओं का रोल मॉडल कहा गया।’

अप्रत्यक्ष रूप से अहसान न मानने के जो आरोप रवीना लगा रही हैं, जायरा के पोस्ट में उन्हें इसका जवाब भी समझना चाहिए था। वह अपने इन 5 वर्षों को लेकर कहती है कि- “मैं सच्चाई के साथ कबूल करती हूं कि इन पांच वर्षों में मुझे जो पहचान मिली उससे मैं खुश नहीं हूं।”

रिवर्स सीक्रेट सुपर स्टार!

कितनी अजीब बात है। पर्दे की जिंदगी से असल की जिंदगी ने 180 डिग्री का टर्न लिया है। सीक्रेट सुपर स्टार में जो लड़की अपनी पहचान पाने के लिए पुरानी सोच वाले अपने पिता से लड़ती है। जीत हासिल करती है। मंजिल पाने की नई परिभाषा एक पूरी पीढ़ी के सामने रखती है। अब वही कह रही है कि वह तो मंजिल थी ही नहीं। वह तो एक सपना था। और जब नींद खुली तो सब खोखला था। एक मिथ्या।

क्या पता जायरा किस बड़े मिशन की सोच रही हो!

तो क्या जायरा ने अपने लाखों-करोड़ों फैंस को धोखा दिया है? उसने असल जिंदगी से लेकर पर्दे के जरिये जो राह युवाओं को दिखाई वह उसका झूठ था? तो एक मायने में क्या जायरा गुनहगार है? नहीं। जायरा की उम्र इस वक्त 18 साल 8 महीने है। हममें से कई लोगों ने उसे ‘सीक्रेट सुपरस्टार’ से रातों-रात ‘विलेन’ करार दे दिया। युवाओं की उम्मीदें तोड़ने वाली विलेन। फैंस से धोखा करने वाली विलेन। और हां, इस्लाम की विलेन।

क्या जायरा ने इस्लाम का अपमान किया?

एक पूरी जमात उठ खड़ी हुई है और कह रही है कि जायरा ने इस्लाम का अपमान किया है। उसने ये साबित करने की कोशिश की है कि इस्लाम एक्टिंग और फिल्मी लाइन चुनने की आजादी नहीं देता। लेकिन क्या जायरा के फेसबुक पोस्ट से ऐसा लगता है। किसी ने उससे पूछा कि वह एक्टिंग और फिल्मी करियर को इस्लाम के खिलाफ बता रही है या जिस पूरे माहौल में उसने अपने पिछले 5 साल गुजारे उसे? जायरा के पोस्ट की भाषा पर गौर करें। वह किसी चीज को इस्लाम के खिलाफ ठहराने की बजाय खुद के कहीं होने (फिल्म लाइन में) की वजह से खुदा की राह से दूर हो जाने की बात कह रही है। इसमें क्या बुरा है? ये तो निहायत व्यक्तिगत मामला है। एक ही स्थान पर रहकर कोई एक शख्स एक साथ पांच या पचास चीजों को साध सकता है। जबकि यह संभव है कि दूसरे में  तालमेल बिठाने की इतनी काबिलियत न हो! उसने यह तो कहीं कहा नहीं है कि रुपहले पर्दे का ये जो पूरा कॉन्सेप्ट है वह इस्लाम के खिलाफ है! ज्यादा-से-ज्यादा उसने इसे खुद और अल्लाह के बीच दूरी पैदा करने वाला माना है। और यह क्यों नहीं संभव है?

हमारे कई क्रिकेटर बेहद पढ़े-लिखे भी रहे हैं। अनिल कुंबले अच्छे-खासे इंजीनियर थे। आज का कोई युवा यह कहते हुए क्रिकेट छोड़ दे कि उसकी पढ़ाई पर इसका असर पड़ रहा है, तो क्या हम क्रिकेट को विलेन मान बैठेंगे? और फिर क्या हम कुंबले का उदाहरण देकर तमाम दूसरे बच्चों से उम्मीद करेंगे और उस पर दबाव डालेंगे कि वह एक साथ कुंबले जितना अव्वल क्रिकेटर भी बन जाए और इंजीनियर भी?

पिता की मौत से भी अविचलित रहकर अगर आप सचिन और विराट कोहली बन जाते हैं, तो यह आपके जज्बे की निशानी है। अगर आप एक सामान्य इंसान होकर ऐसा करते हैं, तो समाज आपको यह कहकर ताने दे सकता है कि- देखो कैसा नालायक बेटा है। इस पर तो अपने बाप की मौत का कोई असर ही नहीं है। हमें दोनों ही स्थितियों के लिए तैयार रहना होता है। शायद जायरा वसीम भी तैयार होगी।

याद रहे वह अभी 18 साल की बच्ची है

हम एक पौने उन्नीस साल की लड़की से क्यों ऐसी और इतनी उम्मीद कर रहे हैं? क्यों उसके सामने परिपक्व मुस्लिम एक्टर-एक्ट्रेस का उदाहरण पेश कर उसके फैसले को गलत ठहरा रहे हैं? किसी जमाने में कुछ (या कई) मुस्लिम अदाकारा यूं ही कच्ची उम्र में फिल्मी लाइन चुनकर सफल हुई हो, तो उसी का दोहराव जायरा भी करती रहे? इसके लिए हम उसे क्यों बाध्य करें?

हमने दो फिल्मों में जायरा वसीम की पर्दे पर कमाल की एक्टिंग देखी है। पिछले 5 वर्षों में पर्दे के पीछे की उसकी जिंदगी हमने नहीं देखी। एक इंसान के लिए पर्दे की चमक और दौलत की दमक बाकी तमाम मुश्किलों और समझौतों की भरपाई हो सकती है, जबकि ठीक उसी वक्त दूसरे के लिए ऐसा नहीं हो सकता। इस बात को बार-बार याद करना होगा कि जायरा अगर अल्लाह की राह से भटकने की बात कह रही है, तो इसके लिए वह एक्टिंग नाम की विधा को जिम्मेदार नहीं ठहरा रही। वह उस माहौल को जिम्मेदार ठहरा रही है, जिसमें उसने पांच साल गुजारे हैं। जायरा के पूरे पोस्ट को बार-बार पढ़ें। फर्क साफ समझ में आएगा।

जायरा के फैसले में खोट या हमारी सोच में?

जायरा पर सवाल उठाते हुए क्यों न हम उसके फैसले को विश्लेषित करने की अपनी भी क्षमता को कसौटी पर कसें? कहीं ऐसा तो नहीं कि हमारी सोच वहां तक जा ही नहीं रही हो, जहां तक जायरा सोच रही है? कहीं यह 20वीं सदी में जन्मे लोगों और 21वीं सदी में जन्मी जायरा के बीच का फर्क तो नहीं है? कहीं ये सफलता की अपनी खींची गई लकीर पर दूसरे को खींचकर लाने और चलाने की जिद तो नहीं है? क्या पता जिस बात को हम भौतिकवादी लोग सोच भी नहीं सकते, उसने वैसा कुछ सोच रखा हो और अपनी एक बिल्कुल नई मंजिल गढ़ी हो?

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