खण्डूड़ी को क्या नहीं दिया बीजेपी ने

गढ़वाल लोकसभा में सर्वाधिक 5 बार बीजेपी सांसद रहे
बीसी खण्डूड़ी, आज …….

लोक सभा के रिकॉर्ड में पौड़ी को गढ़वाल लोक सभा छेत्र का उल्लेख है। पौड़ी एक गांव था जो शहर हो गया। मंडल मुख्यालय है। अंग्रेज श्रीनगर गढ़वाल से पौड़ी अपनी कैपिटल ले आये थे।
गढ़वाल लोक सभा को सामान्य भाषा के प्रचलन में पौड़ी लोक सभा कहा जाने लगा।

श्री भक्त दर्शन 1952 ( कांग्रेस)
श्री भक्त दर्शन 1957 ( कांग्रेस)
श्री भक्त दर्शन 1962 ( कांग्रेस)
श्री भक्त दर्शन 1967 (कांग्रेस )
श्री प्रताप सिंह नेगी 1971( कांग्रेस )
श्री जगरनाथ शर्मा 1977 ( जेपी )
श्री हेमवती नंदन बहुगुणा 1980 जेपी (एस)
श्री चन्द्र मोहन सिंह नेगी 1984 (कांग्रेस )
श्री चन्द्र मोहन सिंह नेगी 1989 (जेडी )
श्री भुवन चन्द्र खण्डूड़ी 1991( बीजेपी )
श्री सतपाल महाराज 1996 ( कांग्रेस तिवाड़ी )
श्री भुवन चन्द्र खण्डूड़ी 1998 ( बीजेपी)
श्री भुवन चन्द्र खण्डूड़ी 1999 ( बीजेपी )
श्री भुवन चन्द्र खण्डूड़ी 2004 (बीजेपी )
श्री टीपीएस रावत 2007 उप चुनाव (बीजेपी )
श्री सतपाल महाराज 2009 ( काँग्रेस )
श्री भुवन चन्द्र खण्डूड़ी 2014 ( बीजेपी )

इसमें सबसे बड़े नेता हुए श्री भक्त दर्शन , जो 4 बार सांसद रहे। और पंडित नेहरू के मंत्री मंडल में उप मंत्री मानव संसाधन विकास रहे। इसके बाद हुए श्री एचएन बहुगुणा बड़े नेता हुए। बहुगुणा भक्त दर्शन को गुरु मानते थे। भक्त दर्शन जब दुनिया से विदा हुए उनके पास दो जोड़ी कुर्ता पायजामा था। सादगी भरा उनका जीवन रहा। उसके श्री चन्द्र मोहन सिंह नेगी , नेता हुए। बीपी सिंह ने उनके साथ धोखा न करते तो वे जल्दी मरते भी नहीं। उसके बाद हुए भुवन चन्द्र खण्डूड़ी। सेना में मेजर जनरल पद से रिटायर्ड होने के बाद बीजेपी ने उनके लिए रेड कारपेट बिछा दिया था।

खण्डूड़ी को क्या नहीं दिया बीजेपी ने। 5 बार लोक सभा सांसद। 6 बार टिकट। 1999 में बाजपेयी मंत्रिमंडल में भूतल परिवहन मंत्री (स्वत्रंत प्रभार )। उसके बाद उत्तराखंड का दो बार चीफ मिनिस्टर। इतिहास में है कि, 2007 में जब देहरादून के पेसेफिक होटल में बीजेपी के नए चुने गए विधायको की बैठक हुई तो एक तिहाई एमएलए भगत सिंह के पक्ष में होने के बाद भी बाजपेजी आडवाणी जी, रंजन भटाचार्य का इतना दबाव था कि, खण्डूड़ी के नाम पर मुहर लग गई। बीच में हटे। फिर बन गए। उत्तराखंड के बीजेपी के इतिहास में खण्डूड़ी पहले नेता हैं जिनके नेतृव में विधानसभा का तीसरा चुनाव लड़ा गया। वे स्वयं चन्द्र मोहन सिंह नेगी, हरीश रावत के शिष्य श्री सुरेंद्र सिंह नेगी से हार गए। सपूर्ण बीजेपी को जीता गए। फिर 2014 में बीजेपी के गढ़वाल से सांसद हैं। इससे पहले 2017 में अपनी बेटी ऋतु बेंजवाल को यमकेश्वर में बीजेपी का टिकट दिलाकर, विजय बनाने में कामयाब रहे।

फिर हुए सतपाल महाराज। महाराज दो बार सांसद रहे। इस बार राज्य में केबिनेट मंत्री हैं।महाराज को राजनीतिक अक्ल, इतनी नहीं जितनी औरों को हैं।यदि होती तो कश्मीर से कन्याकुमारी तक राज करते। श्री लाल कृष्ण आडवाणी ने एक बार कहा था कि राजनीति अब बिजिनेस हो गई है। सही भी लगने लगा है। यह जहाज डूब रहा है उस मे शिफ्ट हो जाओ।

वरिष्ठ पत्रकार और बीजेपी आरएसएस को करीब से जानने वाले श्री सुदीप पंचभैया कहते हैं बीजेपी को सीनियर नेताओं को
पार्टी में लेना नहीं चाहिए। वे कब धोखा दे दे, पता ही नहीं चलता। उन्होंने कहा तीरथ सिंह रावत को टिकट नहीं मिलेगा, तो वह पार्टी कभी नहीं छोड़ेंगे। सुदीप कहते हैं निशंक को बीच में मुख्यमंत्री से हटाना, एक आदमी को जरूरत से ज्यादा दे देना, जो आरएसएस परिधि से है ही नहीं आज बीजेपी को खल रहा होगा।

By: शीशपालगुसाईं

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