आज एक सदी का चैतन्य गवाह चले गये

आज एक सदी का चैतन्य गवाह चले गये

हमारे लिए अपना उजला इतिहास छोड़ गये

यह फोटो दिसम्बर 2016 की है। मैं उन्हें मनाने और बात तय करने वंसत विहार घर गया था। उन्हें कार्यक्रम की अध्यक्षता करनी थीं। उन्हें सुनाई कम देता था। किंतु स्मृतियां 1930, 40 ताजी थीं।  उन्होंने बताया, वे कैसे भिलंगना नदी को टपते हुए
जंगलों के रास्ते , मेरठ पहुँचे थे। कैसे प्रजा मंडल गवर्नमेंट  का गठन हुआ। और कैसे सांसद बने।

वरिष्ठ पत्रकार श्री महीपाल सिंह नेगी बताते हैं पैन्यूली जी का  कद श्रीदेव सुमन जी से ऊपर मानते हैं। वे तर्क देकर कहते हैं
देश आज़ादी की बात हो, या टिहरी की आज़ादी की ,उनका अहम योगदान रहा।ईमानदारी से उन्होंने संघर्ष किया। वे कहते हैं 1940 में महात्मा गांधी जी से मिल कर, पैन्यूली जी बहुत प्रभावित हुएथे। फिर गाँधी के बताए रास्तों पर चलने लगे।

उनके भतीजे श्री बनमाली पैन्यूली ने दो साल पहले मुझे बताया  था। 1971 में उनके सांसद बनने के बाद देहरादून का भरतू
उनके नजदीक आया। बहुत लालच दिया। लेकिन वे स्कूटर  से कार में नहीं आये। भरतू के काम उन्होंने निस्वार्थ किये।
लेकिन दूरी भी बनाई। पैन्यूली जी 71 मे जीते, इमरजेंसी के बाद 1977 में इंदिरा गांधी का जब काफी लोगों ने साथ छोड़ा तब पैन्यूली जी उनके साथ खड़े रहे।हेमवती नंदन बहुगुणा जी उन्हें अपने पाले में खींचना चाहते थे। प्रयास हुए। वे नहीं आये। लेकिन उनकी आत्मा कांग्रेस में रही। विचारधारा वही थीं।उसके बाद वे अंग्रेजी अखबार में  लिखने लग गए थे। 1996 में कमिश्नर बीएम बोहरा के ऑफिस के बाहर एक साधारण पत्रकार की तरह वे सभी पत्रकारों  के साथ मिले थे। उनमें सादगी थीं। एक पूर्व सांसद वाला रौब नहीं था। दुष्टता नहीं थीं। उन्होंने ईमान कभी नहीं बेचा।

उनकी चार बेटियां हैं। उनके साथ उनका ड्राइवर कम सहायक रहता था। आज एक सदी का चैतन्य गवाह चला गया।  हमारे लिए अपना उजला इतिहास छोड़ गया।

सलाम पैन्यूली जी

शीशपाल गुसाईं

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *