हांगकांग का कोउलून, थ्येनमॉन चौक पर प्रदर्शन की आई याद , वजह है ये

हांग कांग में प्रत्यर्पण कानून के खिलाफ लोगों का प्रदर्शन जारी है। रविवार को हजारों लोगों ने प्रस्तावित कानून का विरोध करते हुए शहर के कोउलून क्षेत्र की तरफ मार्च किया और अभिव्यक्ति की आजादी के पक्ष में नारे लगाए। यह प्रदर्शन इसलिए खास है कि क्योंकि पहली बार इसका असर मुख्य शहर से दूर बंदरगाह वाले इलाके में दिखाई दिया। बताया जा रहा है कि प्रदर्शन के लिए कोउलून को चुनने का मकसद चीन के पर्यटकों को प्रस्तावित कानून के बारे में बताना था क्योंकि वे बड़ी संख्या में खरीदारी करने इस शहर में आते हैं।

हांग कांग पुलिस का कहना है कि इस प्रदर्शन मनें करीब 56,000 प्रदर्शनकारियों ने हिस्सा लिया जबकि प्रदर्शन के आयोजककर्ताओं का दावा है कि इस मार्च में 230,000 लोग शामिल हुए। पुलिस का कहना है कि यह प्रदर्शन ‘शांतिपूर्ण’ था लेकिन छह लोगों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने कहा कि रविवार को मार्च के दौरान सड़क बाधित करने, पुलिस पर हमला करने और पहचान पत्र पेश नहीं कर पाने के खिलाफ ये गिरफ्तारियां हुईं। मार्च के दौरान प्रदर्शनकारी चीन सीमा से नजदीक पश्चिमी कोउलून स्टेशन समीप के पास एकत्रित हुए। यह स्टेशन चीन सीमा के करीब है। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने चीनी भाषा मंडारिन में नारे लगाए ताकि चीन से आने वाले पर्यटक उनकी मांग और अपील को समझ सकें।

लोगों के चीन भेजे जाने की आशंका
प्रदर्शनकारियों को आशंका है कि प्रस्तावित प्रत्यर्पण कानून यदि वास्तवकिता बनता है तो चीन इसका गलत इस्तेमाल कर सकता है। प्रदर्शनकारियों का मानना है कि इस कानून के जरिए सरकार की आलोचना करने वाले लोगों को मुकदमे का सामना करने के लिए चीन भेजा जा सकता है। हांग कांग में लोगों के विरोध-प्रदर्शन को देखते हुए सरकार ने हालांकि इस प्रस्तावित विधेयक को रोक लिया है लेकिन प्रदर्शनकारियों के मन में आशंका बरकरार है और वे लगातार इस कानून का विरोध कर रहे हैं।

एक्जुक्यूटिव कैरी लैम के इस्तीफे की मांग
प्रदर्शनकारी पूरी तरह से इस विधेयक को वापस लेने और हांग कांग की एक्जुक्यूटिव कैरी लैम के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं हो जातीं तब तक उनका प्रदर्शन जारी रहेगा। रविवार के प्रदर्शन में शामिल होने वाले एक विधि कंपनी में सहायक पेन्नी लाउ ने कहा कि सरकार जब तक उनकी मांगों को पूरा नहीं करती तब तक उनका प्रदर्शन चलता रहेगा। उन्होंने कहा, ‘मेरा मानना है कि सरकार जब तक हमारी मांगों को अनसुना करती रहेगी तब तक प्रदर्शन में कोई कमी नहीं आएगी।’

ब्रिटेन और चीन में तल्खी
इस बीच ब्रिटेन में चीनी राजदूत लिउ जियोमिंग ने रविवार को कहा कि लैम को विवादित प्रत्यर्पण कानून को लागू करने के लिए बीजिंग से कोई निर्देश अथवा आदेश नहीं मिला है। लिउ ने बीबीसी के साथ बातचीत में कहा, ‘चीफ एक्जुक्यूटिव और हांग कांग की सरकार हांग कांग को एक सुरक्षित स्थान बनाना चाहती है न कि भगोड़े अपराधियों के लिए एक सुरक्षित शरणस्थली।’ हांग कांग में जारी प्रदर्शनों पर चीन और ब्रिटेन में भी तल्खी देखने को मिल रही है। ब्रिटेन के विदेश मंत्री जेरेमी हंट ने हांग कांग के प्रदर्शनकारियों के प्रति अपना समर्थन जताया है और कहा है कि उनका देश हांग कांग के ‘सीमित लोकतांत्रिक आजादी’ की सुरक्षा के लिए उसके साथ खड़ा रहेगा। चीन को ब्रिटेन का यह दखल नागवार गुजरा है।

ब्रिटेन की कॉलोनी रह चुका है हांग कांग
हांग कांग उपनिवेश काल से ब्रिटेन की कॉलोनी रहा है लेकिन 1997 में यह चीन को सौंप दिया गया। उस समय के करार के मुताबिक बीजिंग इस बात पर सहमत हुआ कि यह शहर ‘एक देश, दो व्यवस्था’ के सिद्धांत पर चलेगा और अगले 50 सालों में यहां स्वायत्तता का स्तर बढ़ाया जाएगा। बता दें कि चीन के अन्य शहरों की अपेक्षा हांग कांग में लोकतांत्रिक मूल्य ज्यादा मुखर हैं। दोनों देशों के बीच यह सहमति बनी कि चीन का हिस्सा होते हुए हांग कांग ‘विदेश एवं रक्षा मामलों को छोड़कर’ 50 वर्षों तक ‘अपनी स्वायत्तता की भावना’ को जारी रखेगा। इस करार के अनुसार हांग कांग की विधि व्यवस्था एवं अपनी सीमा है। इस करार के तहत उसे अभिव्यक्ति की आजादी एवं विरोध प्रदर्शन करने का अधिकार मिला हुआ है। जबकि चीन में सरकार के खिलाफ न तो कोई आवाज उठा सकता है और न ही विरोध प्रदर्शन कर सकता है।

चीन से भागे हुए लोग यहां लेते हैं शरण
हांग कांग 1842 में हुए युद्ध के बाद ब्रिटेन के अधीन आया और करीब 150 सालों तक इस शहर पर उसका शासन चलता रहा। ब्रिटेन के शासन के दौरान इस द्विपीय देश के बंदरगाहों से कारोबार ने रफ्तार पकड़ी और धीरे-धीरे यह शहर मैनुफैक्चरिंग का एक बड़ा हब बन गया। इस समय हांग कांग चीन से भागे हुए लोगों के लिए शरणस्थली बन गया है। चीन सरकार के विरोध में आवाज उठाने वाले और वहां की दमनकारी नीतियों से बचने के लिए लोग इस शहर में आकर शरण लेते रहे हैं।

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