तकनीकी दिक्कतों से मात खा रहा है पहाड़, 20% लोग देहरादून , हल्द्वानी वाले बुक कर लगा रहे हैं वैक्सीन

राज्य में 10 तारीख तक 17 लाख 79 हज़ार 987 लोगों को कोविड वैक्सीन लगी। जिसमें 6 लाख 29 हज़ार 329 दोनों डोज वाले हैं।  देहरादून और हल्द्वानी से गाड़ी उठाओ पहाड़ पर वैक्सीन लगा के आते हैं शाम तक। क्योंकि रजिस्ट्रेशन, अपॉइंटमेंट वही के केंद्रों का है देहरादून, हल्द्वानी में भीड़ है और कोरोना भी ज्यादा है। इसलिए 20% लोग वैक्सीन की ऑनलाइन बुकिंग करा कर पहाड़ के केंद्रों में दस्तक दे रहे हैं। गाइडलाइंस इस प्रकार की है कि, पटना, बरेली का भी व्यक्ति भिलंगना या भीमताल में वैक्सीन लगा सकता है। बशर्ते उसका कोविड-19 में उस दिनांक का अपॉइंटमेंट हो और ऐसा हो रहा है। जिस प्रक्रिया से पहाड़ के काफी लोग छूट रहे हैं।

वैक्सीन लगाने के लिए पहले रजिस्ट्रेशन करना पड़ता है।फिर 4:00 से 5:00 बजे शाम के बीच कोविड 19 वेबसाइट में अपॉइंटमेंट लेना पड़ता है। इसमें पहाड़ी जिले पिछड़ रहे हैं। मैदानी जिले के लोग पहाड़ी जिलों में फटाफट अपॉइंटमेंट ले रहे है। अपॉइंटमेंट लेने वाले व्यक्ति को केंद्र वाले फोन कर रहे हैं तो वह बता रहा है कि मेरा कोई मर गया है या मुझे गाड़ी नहीं मिली है कोई बता रहा है मैंने देहरादून में टीका लगा दिया तो सवाल पैदा होता है कि उसने पहाड़ वैक्सिंग केंद्रों का अपॉइंटमेंट ही क्यों कराया ? उसने तो पहाड़ का एक आदमी खा दिया, जिसका नेट नहीं चल रहा था या जिसको यह जानकारी नहीं थीं जो वेबसाइट में उलझ गया।

उदाहरण के लिए ले। पिछले 10 मई 21 )से 18 वर्ष से 44 वर्ष तक कि लोगों की कोविड-19 वैक्सीन लगनी पहाड़ के टिहरी जिले में शुरू हुई। राज्य के अन्य जनपदों में भी हुई है। लेकिन भिलंगना ब्लॉक के बालगंगा इंटर कॉलेज में जो कोविड-19 सेंटर है वहां पर देहरादून के लोग तक पहुंच रहे हैं। राजकीय इंटर कालेज थत्यूड़ में मसूरी से 20% लोग वैक्सीन लगाने पहुंच रहे हैं और वैक्सीन लगाकर वापस लौट रहे हैं। पहाड़ के लोग बहुत जागरूक हैं यहां पर साक्षरता दर 80 प्रतिशत है। जो कि भारत में केरल और उच्च कोटि के राज्यों के मुकाबले है। लेकिन उनका नेट नहीं चल रहा है उनको समझ नहीं आ रही है कि, 4:00 से 5:00 बजे के बीच कैसे अपॉइंटमेंट करेंगे वह रजिस्ट्रेशन तो कर दे रहे हैं। जैसे रेल का रिजर्वेशन होता है वैसे ही कोविड का रिजर्वेशन हो रहा है। 1 घण्टे बाद फुल सीट। वैसे ही। उत्तराखंड के ब्लॉकों में कोविड-19 का हाल है। रेल तो दूसरी आ जायेगी। लेकिन वैक्सीन लिमिटेड आ रही है और एक केंद्र में 100 वैक्सीन ही लगनी है। उधर कुमाऊं में हल्द्वानी के लोग भी भीमताल और अल्मोड़ा तक के सेंटर में कोविड-19 लगाने जा रहे हैं। राज्य के अन्य पहाड़ी जिलों के यही हाल है।

यहाँ के CSC, PHC, HC के हाल इस प्रकार से है कि, साढ़े सात लाख जनसंख्या वाले टिहरी गढ़वाल जिले में कल रात 7 हज़ार वैक्सीन पहुँची है। लगाने के केंद्र हैं 11, यह वैक्सीन एक दिन में 1000 से ज्यादा नहीं लगनी है। यह भी सख्त निर्देश हैं। स्वास्थ्य विभाग के कर्मी एक या दो दिन में ही पूरी वैक्सीन लगा सकते हैं। लेकिन वैक्सीन आ रही है, इस उम्मीद में लोगों को रखना पड़ता है। और वैसे भी पहाड़ी जिले वैक्सीन के कोटे से जूझ रहे हैं। इतने बड़े जिले में 7 हज़ार वैक्सीन और भी पहाड़ में बड़े जिले हैं। कमोबेश टिहरी जैसे हालात हर जिले में हैं। वैक्सीन का टोटा है और जो आ भी रहा है उसमें कार वाले झपट्टा मार रहे हैं अपनी तकनीकी से।

उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल जिले में अब तक एक लाख लोगों को वैक्सीन लग गई है। राज्य में 10 तारीख तक 17 लाख 79 हज़ार 987 लोगों को कोविड-19 वैक्सीन लग गई है। जिसमें 629329 लोगों को दोनों वैक्सीन की डोज लग चुकी हैं। वैक्सीन सेंटर में 10 आदमियों के आने पर एक वैक्सीन का किट खुलता है। उसमें वैक्सीन लगाने वाले 10 व्यक्ति जरूरी पात्र होने चाहिए। लेकिन कहीं-कहीं पर पहाड़ पर देहरादून से जो अपॉइंटमेंट लिया हुआ व्यक्ति है। वह आ नहीं पा रहा है।
केंद्र वाले उसकी इंतजार में 5:00 बजे तक बैठे रहते हैं

किसी किसी केंद्र में एक व्यक्ति आ रहा है उसमें 10 वैक्सीन का पैकेट खोल दिया जा रहा है। इस प्रकार से कहीं-कहीं केंद्रों में 9 डोज बेकार जा रही है। और 9 डोज 4 घंटे बाद स्वाभाविक रूप से बेकार हो जाती है। कुछ लोग कहते हैं कि मैं देहरादून से गाड़ी बुक करा कर आ रहा हूं, क्योंकि केंद्र सरकार की गाइडलाइन है कि कोई भी व्यक्ति कोविड-19 की वैक्सीन किसी भी जिले और किसी भी राज्य का हो, उसे रजिस्ट्रेशन, आपाइर्मेंट के आधार पर लगा सकता है। इस तरह के लोग केंद्र के उसी का गाइडलाइंस का फायदा उठा रहे हैं। लेकिन इसमें एक दुखद कहानी यह भी है कि कुछ लोग अपॉइंटमेंट अपनी सहूलियत के हिसाब से दो दो और तीन तीन जगह ले रहे हैं। और वैक्सीन लगाने जा एक ही जगह रहे हैं। जब उसका टीका एक ही जगह लगेगा, तो दो जगह की वैक्सीन हो गई न खराब। उस वैक्सीन की कीमत बाजार में 12 सौ रुपए है और वहां वहां पर अपॉइंटमेंट के हिसाब से यदि 10 वैक्सीन का पैकेट खुलता है तो वह 12 हज़ार कीमत होती है यानी 12 हज़ार का अलग से नुकसान। यह वैक्सीन लगाने की खुली अपॉइंटमेंट प्रतिस्पर्धा में पहाड़ पिछड़ रहा है।

राजकीय इंटर कालेज बड़कोट नंदगांव ब्लॉक जाखणीधार टिहरी बांध के निकट वाले सेंटर में वैक्सीनेशन हो रहा हैं। यहां हर दिन 20 से लेकर 30% लोग मैदानी जिलों से आ रहे हैं। बड़कोट केंद्र वाले चाह कर भी इनकार नहीं कर सकते हैं।
क्योंकि भारत सरकार की कोरोना गाइडलाइंस है।
उदाहरण के लिए बड़कोट के सामने खांड गांव धार मंडल पट्टी के सामाजिक कार्यकर्ता मित्र श्री राजेंद्र काला को मैंने कई बार फोन करके कहा, कि वह अपनी कोविड-19 वैक्सीन लगा लें।उन्होंने रजिस्ट्रेशन तो करा लिया है लेकिन अपॉइंटमेंट नहीं ले पाए हैं जब तक वह अपॉइंटमेंट लेते हैं तब तक सीटें फुल हो जाती हैं। कभी पहाड़ पर इस धार में उस धार में इंटरनेट के सिग्नल नहीं आते हैं। इस तरह से पहाड़ के सैकड़ों और हजारों लोग वैक्सीन लगाने से छूट रहे हैं।

देहरादून , हल्द्वानी के लोग इसमें ज्यादा दिलचस्पी दिखा रहे हैं। राज्य के 95 ब्लॉक में वह सुबह वेक्सिनेशन केंद्रों में जाते हैं और लौटा दिए जाते हैं क्यों ? तुम्हारा आज अपॉइंटमेंट नहीं था। जिसको कोरोना वैक्सीन दी जाती है उसको प्रमाण पत्र भी मिलता है और सरकार के पास बताने के लिए आंकड़े भी फिट रहते हैं। पहाड़ के काफी लोग तकनीकी का शिकार हो रहे हैं।

राज्य सरकार को केंद्र को यह प्रस्ताव देना चाहिए कि, जो भी कोविड-19 लिए अपॉइंटमेंट लिया जा रहा है, उसके टीके एक ही जगह लगाये जाएं। जगह-जगह व्यक्तियों के लिए अपॉइंटमेंट एक नाम से न किया जाये। इस मौजूदा व्यवस्था से यह हो रहा है कि पहाड़ पर काफी वैक्सीन बर्बाद हो रही हैँ। और जो स्थानीय जरूरतमंद आदमी हैं और जिसके पास स्मार्टफोन नहीं है, वेबसाइट का अभाव है इंटरनेट नहीं है फोन के सिग्नल नहीं है वह भटक हैं। वह वैक्सीन चाह कर भी नहीं लगा पा रहा है! अकेले टिहरी जिले में 18 से 44 वर्ष तक के ढाई लाख लोग हैं जिसमें कुल 6300 लोगों को वैक्सीन लगी है।

पहाड़ के गांव में बुखार से पीड़ित हैं। ज्यादातर लोग टेस्ट करा रहे हैं तो गांव के गांव कोविड-19 पॉजिटिव आ रहे हैं
यह तो हमारे बड़े बुजुर्गों का अंदुरुनी शरीर अच्छा है। वह पहाड़ पर खूब पैदल चलते हैं, या चले हैं और काम धंधा करते हैं। घी और प्रोटीन खाया हुआ है। अपनी उगाई सब्जियां, दालें, चावल खाते हैं। इसलिए यहां का बुखार
ठीक हो जा रहा है। गलत ट्रैक में ज्यादातर लोगों में नहीं जा रहा है लेकिन कोविड-19 की वैक्सीन लगनी तो अत्यंत आवश्यक है। जिसका अभाव दिखता है। गाँव में स्वास्थ्य विभाग का कोविड की जागरूकता, वैक्सीन लगाना अनिवार्य है, फलां केंद्र में आज इतनी वैक्सीन लगेगी, आदि आदि का प्रचार प्रसार दिखाई नहीं देता।

शीशपाल गुसाईं

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