तीन दिन में मिलेगा उत्तराखंड के एक लाख कार्मिकों का वेतन

अप्रैल माह का एक पखवाड़ा बीतने के बाद भी कर्मचारियों को वेतन न मिल पाने को लेकर राज्य कर्मचारी संयुक्त मोर्चा ने कोषागार निदेशालय का घेराव कर दिया।

इस दौरान निदेशालय के अधिकारियों के साथ किए गए मंथन के बाद आश्वासन दिया गया कि तीन दिन के भीतर सभी कार्मिकों को वेतन जारी कर दिया जाएगा। साथ ही कोषागार के इंटीग्रेटेड फाइनेंस मैनेजमेंट सिस्टम (आइएफएमएस) के सॉफ्टवेयर में सुधार कर कर्मचारियों की अन्य समस्याएं भी दूर कर दी जाएंगी।

बड़ी संख्या में कर्मचारी लक्ष्मी रोड स्थित कोषागार निदेशालय पर धमक पड़े। कर्मचारी नेता ठा. प्रहलाद सिंह ने बिना उचित तैयारी व प्रशिक्षण के कोर ट्रेजरी सिस्टम की जगह आइएफएमएस के सॉफ्टवेयर को शुरू करने पर नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि आधा अप्रैल बीत जाने के बाद भी आधे कार्मिकों को ही मार्च का वेतन मिल पाया है। इसके अलावा नए सॉफ्टवेयर में भत्तों को दर्ज ही नहीं किया जा सका है।

हालांकि, इस दौरान मोर्चा के प्रतिनिधिमंडल के साथ वार्ता करते हुए निदेशक एलएन पंत व अपर निदेशक एएस चौहान ने आश्वासन दिया कि शेष एक लाख कार्मिकों को तीन दिन के भीतर वेतन जारी कर दिया जाएगा। वहीं, जिलाधिकारियों से भी सहयोग मांगा जा रहा है कि वह ऐसे आहरण वितरण अधिकारियों (डीडीओ) की सूची तैयार करें जो नए सिस्टम में काम करने में असहज महसूस कर रहे हैं।

 

इसके साथ ही नए सॉफ्टवेयर में भत्तों को दर्ज कराकर मई माह से सभी सेवाएं बहाल कर दी जाएंगी। घेराव करने वालों में प्रदीप कोहली, अरुण पांडे, एनके त्रिपाठी, राजेश शुक्ला, आरपी रतूड़ी, ओमवीर सिंह, गुड्डी मटूड़ा, रेणू लांबा आदि शामिल रहे।

कोषागार निदेशक ने कहा कि 22 अप्रैल को सभी विभागों के आहरण वितरण अधिकारियों व वित्त नियंत्रकों को प्रशिक्षण दिया जाएगा, ताकि वह बजट पास करने के लिए बनाई गई नई प्रणाली को भली-भांति समझ सकें। दून में 60 फीसद का वेतन जारी देहरादून के मुख्य कोषाधिकारी नरेंद्र सिंह ने बताया कि देहरादून जिले के करीब 60 फीसद कार्मिकों का वेतन जारी कर दिया गया है।

उन्होंने बताया कि पुराने सिस्टम में बजट पास करने के साथ ही उसके बिल प्रिंटशीट में कोषागार कार्यालय में लाए जाते थे, जबकि नई व्यवस्था में सबकुछ ऑनलाइन हो गया है। अब संबंधित कार्यालय से ऑनलाइन भुगतान बनकर कोषागार में आते हैं और फिर यहां से उसे आरबीआइ की साइट पर भेज दिया जाता है। आरबीआइ से सीधे संबंधित खातों में भुगतान जारी कर दिया जाता है।

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