23 अप्रैल का दिन ऐतिहासिक है

महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी चंद्र सिंह गढ़वाली का नाम आज की तारीख में दुनिया में लिखा गया है। ब्रिटिश गवर्नमेंट ने उन पर कई पाबंदियां लगा दी थी और ब्रिटिश गढ़वाल में उनके आने पर रोक थी, लेकिन अपनी धरती अपनी ही धरती होती है उनसे नहीं रहा जा सका।वह रानीखेत प्रवास में रहे। बाद में आजादी मिलने के बाद उन्होंने जन जागरण अभियान चलाये। वह भोपू से प्रचार करते थे। वह भक्त दर्शन के साथ लोकसभा चुनाव भी लड़े। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री सीबी गुप्ता एक बार मसूरी आए थे तो वहां चंद्र सिंह गढ़वाली धरने पर बैठ गए। उनकी मांग थी राठ क्षेत्र को उत्तर प्रदेश और भारत सरकार एक पर्यटक स्थल बनाए।

अब वह दुनिया में नहीं हैं। लेकिन 23 अप्रैल तारीख जीवित है। सरकार ने उनके नाम कई योजनाएं चलाई हुई हैं। जो उनके प्रति सम्मान देने की अच्छी पहल है। उनके गृह क्षेत्र श्रीनगर विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत पीठसैण में उनकी याद में क्षेत्रीय विधायक व प्रदेश में उच्च शिक्षा मंत्री डॉ धन सिंह रावत ने उनकी याद में करीब ढाई करोड़ की लागत का एक द्वार और मूर्ति बनाई है।जिसका लोकार्पण आज होना था।लेकिन कोरोनावायरस के बढ़ते प्रभाव के कारण यह नहीं हो सका। पिछले साल भी इसी दिन रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह जी को आना था।लेकिन लॉक डाउन की वजह से नहीं हो पाया। पीठसैण में यह द्वार गढ़वाली की मातृभूमि में सिर ऊंचा करती है। जो नई पीढ़ी है वह इस द्वार से प्रेरणा ले सकती है। राठ क्षेत्र भी पर्यटन के नक्शे पर आ रहा है। मेरे कई राठी मित्र कहते हैं गढ़वाली जी की मुख्यमंत्री सीबी गुप्ता से मांग अब दिखाई पड़ती है।

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