24 मई को खुलेंगे द्वितीय केदार भगवान मद्महेश्वर धाम के कपाट

भगवान मद्महेश्वर धाम के कपाट खोलने की प्रक्रिया शीतकालीन गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर में पौराणिक परम्पराओं व रीति-रिवाजों के साथ शुरू हो गई है भगवान मद्महेश्वर की चल विग्रह उत्सव मूर्तियों को वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ ओंकारेश्वर मंदिर के गर्भ गृह से सभा मंडप पर लाया गया वहीं सीमित महिलाओं द्वारा भगवान मद्महेश्वर को नए अनाज का भोग अर्पित किया गया  मद्महेश्वर में भगवान शंकर के मध्य भाग की पूजा होती है

शुक्रवार यानी आज भी भगवान मद्महेश्वर सभा मंडप में विराजमान रहेंगे. 22 मई को भगवान मद्महेश्वर की डोली ऊखीमठ से अपने धाम के लिए रवाना होगी. जानकारी के मुताबिक इस साल भी लॉकडाउन के कारण भगवान मद्महेश्वर की डोली मंगोलचारी से रांसी तक रथ से जाएगी ओंकारेश्वर मंदिर से मंगोलचारी तक परम्परा के मुताबिक पैदल पथ से जाएगी. वहां से रथ से राकेश्वरी मंदिर रांसी पहुंचेगी 23 मई को भगवान मद्महेश्वर की चल विग्रह उत्सव डोली राकेश्वरी मंदिर रांसी से प्रस्थान कर अंतिम रात्रि प्रवास के लिए गौंडार गांव पहुंचेगी. 24 मई को गौंडार गांव से प्रस्थान कर बनातोली, खटारा, नानौ, मैखम्भा कूनचटटी होते हुए मद्महेश्वर धाम पहुंचेगी मदमहेश्वर धाम के कपाट परम्परानुसार विधि-विधान से ग्रीष्मकाल के लिए खोल दिए जाएंगे

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