उत्तराखंड सरकार की नेक पहल- कोरोना से मां-पिता को खो देने वाले बच्चों की जिम्मेदारी लेगी सरकार

कोरोना नामक जानलेवा वायरस अबतक कई लोगों की जान ले चुका है सैकड़ों लोग अपने परिजनों को खो चुके हैं और लगातार अभी भी लोग इसकी चपेट में आ रहे हैं और तेजी से जान गंवा रहे हैं। कोरोना की पहली और दूसरी लहर उन बदकिस्मत बच्चों के ऊपर सबसे अधिक मुसीबत बनकर टूट पड़ी है जिन्होंने इस महामारी में अपने माता और पिता दोनों को खो दिया है और बेसहारा हो गए हैं।

उत्तराखंड में भी कई बच्चों के ऊपर से माता और पिता दोनों का साया हट चुका है और अब उनके पास कोई सहारा नहीं है। ऐसे बेसहारा बच्चों के वर्तमान के साथ ही भविष्य के ऊपर भी एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। इन बच्चों को कौन पालेगा, कौन इनका लालन-पोषण करेगा जैसे तमाम सवाल खड़े हो जाते हैं। ऐसे बेसहारा बच्चों की तरफ उत्तराखंड सरकार ने मदद का हाथ आगे बढ़ाया है। कोविड  महामारी के चलते अपने माता-पिता को खो चुके बच्चों के लिए उत्तराखंड के मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने एक अहम घोषणा की है कि कोविड की महामारी में अपने माता-पिता को खोने वाले बच्चों को 21 वर्ष की आयु तक मुख्यमंत्री वात्सल्य योजना के तहत प्रति माह 3000 का भत्ता दिया जाएगा। सीएम रावत ने फेसबुक पर यह एलान किया है

दरअसल बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने घोषणा की थी कि जिन भी राज्यों में भाजपा की सरकार है वहां कोविड के कारण माता-पिता को खो कर अनाथ हुए बच्चों के लिए यह योजना लाई जाएगी। ऐसे में कई राज्य ऐसे अनाथ बच्चों की तरफ सहयोग और सहानुभूति का हाथ बढ़ा रहे हैं जिसके बाद उत्तराखंड सरकार ने भी कोविड काल में अनाथ हुए बच्चों को सहारा दिया है और इस कठिन समय में उनकी तरफ मदद का हाथ बढ़ाया है। जिसके बाद उत्तराखंड में कोविड के कारण अपने माता-पिता को खोने वाले बच्चों को राज्य सरकार की ओर से 21 साल की आयु तक ” मुख्यमंत्री वात्सल्य योजना ” के तहत प्रतिमाह 3 हजार रुपए दिए जाएंगे। सीएम तीरथ सिंह रावत ने सोशल मीडिया पर इसकी जानकारी दी है।

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