रौलाकोट के बांध प्रभावित ग्रामीणों ने मांगा विस्थापन

रौलाकोट के बांध प्रभावित ग्रामीणों ने गांव का विस्थापन न किए जाने पर नाराजगी जताई है। ग्रामीणों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के नौ साल भी पुनर्वास विभाग की ओर से बांध प्रभावित ग्रामीणों के विस्थापन के लिए कोई कार्रवाई अमल में नहीं लाई गई है। उन्होंने डीएम को ज्ञापन सौंपते हुए प्रभावितों का शीघ्र विस्थापन किए जाने की मांग की है। टिहरी बांध प्रभावित रैका पट्टी के रौलाकोट के ग्रामीणों ने डीएम से मुलाकात कर ग्रामीणों के विस्थापन की मांग की। ग्रामीण बलवीर सिंह, अरविंद नौटियाल ने बताया कि टिहरी बांध की झील के चलते गांव के तीनों ओर से भू-धंसाव हो रहा है। जिससे ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। ग्रामीणों ने पुनर्वास विभाग पर लेटलतीफी का आरोप लगाते हुए कहा कि वर्ष 2005 में झील भराव के बाद से ही गांव के आपसास भू-धंसाव हो रहा है। जिसको लेकर भूगर्भीय वैज्ञानिक भी गांव का सर्वे कर रौलाकोट, नकोट, स्यांसू गांव के विस्थापन की संस्तुति कर चुके हैं। लेकिन कुल 13 साल बीतने के बाद भी प्रभावित ग्रामीणों की सुध तक नहीं ली गई है। जबकि पुनर्वास विभाग के पास रौलाकोट गांव के पेड़ों के भुगतान संबंधी पत्रावली भी लंबित पड़ी है। ग्रामीणों ने डीएम से प्रभावितों का शीघ्र पुनर्वास किए जाने की मांग की है। ज्ञापन देने वालों में बच्चीराम, जगमोहन, उत्तम सिंह धनाई, मायाराम, प्रेम सिंह, विनोद सिंह, अनिल थपलियाल, मुकेश आदि शामिल रहे।

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